राजौरी में आईईडी विस्फोट में शहीद मेजर चित्रेश बिष्ट का आवास देहरादून में नेहरू कॉलोनी में है। घर में सांत्वना देने वाले लोगों का जमावड़ा लगा है।
'हमेशा जल्दी में रहा, अब जल्दी ही चला गया' पिता ने जिस तरह बताई शहीद की जीवन गाथा, पढ़कर भर आएगा दिल
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सवाल परेशान कर रहा है, जिस छोटे लाडले बेटे को कभी गोद में खिलाया। अंगुली पकड़कर चलना सिखाया। अब उसे इस हालत में कैसे देख पाऊंगा। हर आने-जाने वाले के सामने पिता अपने शहीद बेटे की ही बात कर रहे हैं।
रूंधे गले से बोले...हमेशा जल्दी में ही रहा। अब जल्द ही चला भी गया...कहते-कहते उनकी आंखों से आंसू टपकने लगे। आसपास बैठे लोगों ने उन्हें ढाढ़स बंधाया। कभी जिंदादिल इंस्पेक्टर रहे एसएस बिष्ट आज बेटे के गम में टूट चुके हैं।
घर के आंगन में सोनू का पहला कदम और सरहद पर मेजर चित्रेश की आखिरी सांस... सब मानो जैसे उनकी आंखों के सामने ही चल रहा था। बचपन से लेकर अब तक की हर बात को याद कर बोले...सोनू, बेटे तू हमेशा जल्दी में ही रहा।