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अजीत डोभाल फिर बने एनएसए, इसलिए कहलाते हैं हिंदुस्तान के 'जेम्स बांड', पढ़िए जांबाजी के किस्से

Tue, 04 Jun 2019 08:14 AM IST
Nirmala Suyal Nirmala Suyal न्यूज डेस्क, अमर उजाला, देहरादून
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, देहरादून Published by: Nirmala Suyal Nirmala Suyal Updated Tue, 04 Jun 2019 08:14 AM IST
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national security advisor ajit dobhal get extension and cabinet rank 
फाइल फोटो

पिछली सरकार में राष्ट्रीय सुरक्षा सलाहकार रहे अजीत डोभाल को प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने फिर पांच साल के लिए नेशनल सिक्यॉरिटी ऐडवाइजर (एनएसए) नियुक्त कर दिया गया है। इसके अलावा उन्हें सरकार में कैबिनेट रैंक भी दी गई है। कैबिनेट में अब उनका कद राज्यमंत्री के बराबर होगा। 

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- फोटो : पीटीआई

पाकिस्तान के कब्जे वाले कश्मीर में घुसकर आंतकियों के कैपों को नष्ट करने के सर्जिकल स्ट्राइक ऑपरेशन के पीछे राष्ट्रीय सुरक्षा सलाहकार अजीत डोभाल का बड़ा हाथ था। पीओके में अंजाम दिए गए सर्जिकल ऑपरेशन की निगरानी रक्षा मंत्री मनोहर पार्रिकर, राष्ट्रीय सुरक्षा सलाहकार अजीत डोभाल और डीजीएमओ ले.जन. रनबीर सिंह कर रहे थे।

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अजीत डोभाल अटल बिहारी वाजपेई के काफी भरोसेमंद माने जाते थे और अब प्रधानमंत्री मोदी के लिए भी काफी खास हो गए हैं। डोभाल जिस तरह से अपने इंटेलीजेंस ऑपरेशंस को अंजाम देते हैं, उसकी वजह से उन्हें कुछ लोगों ने भारत का 'जेम्स बांड' तक करार देना शुरू कर दिया था।

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- फोटो : अमर उजाला

अजीत डोभाल के मार्गदर्शन में म्यामार में भी भारतीय सेना ने घुसकर उग्रवादियों को मौत की नींद सुला दिया था। देश की सुरक्षा में अजीत डोभाल के योगदान के देखते हुए उन्हें हिंदुस्तान का 'जेम्स बांड' कहा जाता है। अजीत कुमार डोभाल, आई.पी.एस. (सेवानिवृत्त), दोबारा भारत के राष्ट्रीय सुरक्षा सलाहकार बनाए गए हैं।

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- फोटो : पीटीआई

अजीत डोभाल का जन्म 1945 में उत्तराखंड के पौड़ी गढ़वाल में एक गढ़वाली परिवार हुआ। उन्होंने अपनी प्रारम्भिक शिक्षा अजमेर के मिलिट्री स्कूल से पूरी की थी, इसके बाद उन्होंने आगरा विश्व विद्यालय से अर्थशास्त्र में एमए किया और पोस्ट ग्रेजुएशन करने के बाद वे आईपीएस की तैयारी में लग गए। वे केरल कैडर से 1968 में आईपीएस के लिए चुन लिए गए।

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