अब अगले दो महीनों तक हेमंत ऋतु का आगमन होगा। विष्णु जागरण 19 नवंबर को होगा। उसी दिन से विवाहों का शारदीय सीजन प्रारंभ हो जाएगा। इस बार के विवाह सीजन पर कई ग्रह प्रभाव डालेंगे। ग्रहों की स्थिति जानने के बाद ही विवाह करने चाहिए।
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हेमंत ऋतु प्रारंभ होते ही सर्दी और बढ़ जाएगी। इस समापन पर शिशिर आएगी, जिसमें सर्वधिक ठंड पड़ती है। ज्योतिषीय दृष्टि से ऋतु परिवर्तन का दिन सर्दी बढ़ाने वाला होता है। इस हिसाब से मंगलवार से सर्दी का ग्राफ बढ़ेगा। ऋतु परिवर्तन का उभा नक्षत्र में होना भी अधिक शीत लाने वाला माना गया है।
ऋतु परिवर्तन के दिन चंद्रमा मीन राशि में प्रवेश करेगा। इन्हीं दिनों ग्रह संचालन के एक देवता शुक्र अस्त हो चुके है। 10 नवंबर को गुरु भी पश्चिम दिशा में अस्त हो जाएंगे। विवाहों के सीजन से पूर्व सूर्या का प्रवेश वृश्चिक राशि में होना अधिक सर्दी लाने वाला माना गया है। इसी प्रकार कई ग्रहों की चाल दूषित हो रही है।
शुक्र और गुरु क्रमश: दैत्यों और देवताओं के गुरु हैं। दोनों गुरुओं के अस्त होने पर आकाशीय आभा मंडल गड़बड़ा जाता है। गुरुओं के अस्त होने पर शिष्य ग्रह तीव्र गामी हो जाते है। ज्योतिष मान्यताओं के अनुसार आकाश की एक अवस्था आने वाले विवाह सीजन पर प्रभाव डालती है। चार माह पूर्व अषाढ़ मास में धरती पर शिव का साम्राज्य शुरू हो गया था। तब भगवान विष्णु राजा बलि को दिया हुआ वचन निभाते हुए चार महीनों के लिए पाताल चले गए थे।
अब 19 नवंबर से अन्य देवताओ के साथ विष्णु फिर से बाहर आ जाएंगे और इस धरती सहित समूचे ब्राह्मांड की बागडोर संभाल लेंगे। विष्णु के जाग्रत होते ही दैविक शक्तियों का आगमन होगा। तब तक आकाशीय गति भले ही विपरीत रहे, लेकिन देव जागरण के कारण मांगलिक उत्सव आनंदपूर्वक संपन्न होने लगेंगे।