देवस्थानम प्रबंधन के खिलाफ तीर्थ पुरोहितों का गुस्सा फूट पड़ा। चारों धामों के तीर्थ पुरोहित, हक हकूकधारी, व्यापार मंडल, ग्रामीण, कांग्रेस, यूकेडी और अन्य सामाजिक संगठनों से जुड़े लोगों ने ढोल दमाऊं के साथ नगर में महारैली निकाली। तीर्थ पुरोहितों के आंदोलन के समर्थन में बाजार पूरी तरह से बंद रहा। आंदोलनकारियों ने राज्यपाल को प्रेषित ज्ञापन में विधेयक निरस्त करने की मांग की है। साथ ही ऐसा नहीं होने पर उग्र आंदोलन के साथ ही चारधाम यात्रा का बहिष्कार करने की चेतावनी दी है।
बुधवार को देवस्थानम प्रबंधन के खिलाफ गंगोत्री, यमुनोत्री, बदरीनाथ और केदारनाथ धाम के तीर्थ पुरोहितों ने महारैली निकाली। महारैली नगर के मुख्य मार्गों से होते हुए कलक्ट्रेट पहुंची, जहां उन्होंने सरकार के खिलाफ जमकर नारेबाजी की। देवभूमि तीर्थ पुरोहित हक हकूकधारी महापंचायत के बैनर तले निकाली गई रैली में व्यापार मंडल, ग्रामीण, कांग्रेस, यूकेडी सहित अन्य विपक्षी दलों के नेता और विभिन्न सामाजिक संगठन शामिल हुए। रामलीला मैदान में आयोजित सभा में महापंचायत के अध्यक्ष कृष्णकांत कोठियाल ने कहा कि हिंदुत्व के नाम पर सत्ता पर काबिज हुई भाजपा आज हिंदू धर्म के लिए ही खतरा बन गई है।
जनता की मेहनत की कमाई लूटने के बाद अब सरकार की नजर मंदिरों में मिलने वाले दान पर टिकी है, जिसे हासिल करने के लिए सरकार ने अनादिकाल से चली आ रही परंपराओं व पुरोहितों के हक हकूकों पर डाका डालने की नियत से देवस्थानम प्रबंधन विधेयक थोपा है, जिसे किसी भी सूरत में बर्दाश्त नहीं किया जाएगा। प्रदर्शनकारियों में हरीश डिमरी, लक्ष्मीनारायण बाबुलकर, सुरेश सेमवाल, जगमोहन उनियाल, कृपाराम सेमवाल, कृत्तेश्वर उनियाल, राजेश उनियाल, दीपक सेमवाल, अरुण सेमवाल, हरीश सेमवाल, राकेश सेमवाल, अशोक सेमवाल, मानेंद्र सेमवाल सहित कई लोग शामिल हुए।
तीर्थ पुरोहितों की महारैली में कांग्रेस सहित अन्य विपक्षी दलों के नेताओं ने भी प्रतिभाग किया। रैली को संबोधित करते हुए कांग्रेस के प्रदेश अध्यक्ष प्रीतम सिंह ने कहा कि सत्ता के मद में चूर हो चुकी भाजपा जन समस्याओं का निस्तारण करने के बजाय श्राइन बोर्ड जैसे काले कानून लाकर देवभूमि की धार्मिक व्यवस्थाओं को बर्बाद करने पर तुली है। सरकार की इस मंशा को सफल नहीं होने देंगे और सड़क से लेकर संसद तक आंदोलन करेंगे। उन्होंने कहा कि 2022 में उत्तराखंड में कांग्रेस की सरकार बनते ही इस काले कानून को हटा दिया जाएगा।
नेता प्रतिपक्ष इंदिरा हृदयेश ने कहा कि तानाशाही की सारी सीमाएं पार कर चुकी भाजपा सरकार अपने निजी हितों के लिए धार्मिक स्थलों व पुरोहितों के हक हकूकों पर कब्जा करना चाहती है। विधानसभा सत्र में कांग्रेस समेत सभी विपक्षी दलों ने इस विधेयक को पारित करने से पहले प्रवर्तन समिति के पास भेजने की मांग की थी, लेकिन मुख्यमंत्री ने जनभावनाओं को दरकिनार कर विधेयक जबरन पारित करा दिया। सभा को केदारनाथ विधायक मनोज रावत, पालिकाध्यक्ष रमेश सेमवाल, पूर्व गंगोत्री विधायक विजयपाल सजवाण, यूकेडी नेता विष्णुपाल रावत, पूर्व चारधाम विकास परिषद उपाध्यक्ष सूरतराम नौटियाल सहित कई नेताओं ने संबोधित किया।