इस बार महाशिवरात्रि पर तीन अद्भुत संयोग पड़ रहे हैं। पहला शनिवार होने के कारण शनि प्रदोष का योग बन रहा है तो इसी दिन स्वार्थ सिद्धि योग भी पड़ रहा है। वहीं तीसरा 30 वर्षों बाद सूर्य और शनि यानी पिता-पुत्र एक साथ शनि की कुंभ राशि में गोचर करेंगे। ऐसे में इस महाशिवरात्रि का विशेष महत्व बन रहा है।
Maha Shivratri: बन रहे तीन अद्भुत संयोग, 30 सालों बाद होगा ऐसा, इस शुभ मुहूर्त में करें महादेव का जलाभिषेक
मिलेगी सूर्य और शनि की एक साथ कृपा
दूसरा इसी दिन स्वार्थ सिद्धि योग भी पड़ रहा है। स्वार्थ सिद्धि योग में कोई भी कार्य करने से पूर्ण सिद्धि प्राप्त होती है। वहीं तीसरा इस बार 30 वर्षों बाद सूर्य और शनि यानी पिता-पुत्र कुंभ राशि में गोचर कर रहे हैं। इसलिए इस बार व्रतियों को सूर्य और शनि की एक साथ कृपा प्राप्त होगी।
चार पहर की पूजा का विधान
शिवरात्रि के व्रत में चार पहर की पूजा का विशेष विधान बताया गया है। इस बार शिवरात्रि पर चार पहर की पूजा का समय प्रथम प्रहर शाम 6:20 से रात्रि 9:30 तक, दूसरा प्रहर रात्रि 9:30 से रात्रि 12:40 तक, तीसरा पहर रात्रि 12:40 से प्रात: 3:50 तक, चौथा प्रहर प्रात: 3:50 से प्रात: 7:00 बजे तक है।
इन चीजों से करें जलाभिषेक
शिवरात्रि व्रत पर गाय के दूध से शिव का अभिषेक करने से पुत्र प्राप्ति होती है। गन्ने के रस से अभिषेक करने से लक्ष्मी की कृपा प्राप्त होती है। शिवरात्रि के दिन भगवान शिव की विशेष पूजा करने से कालसर्प दोष से भी मुक्ति प्राप्त होती है।
रात्रि 8:00 बजे से होगा शिव का जलाभिषेक
18 फरवरी को रात्रि लगभग 8:00 बजे चतुर्दशी तिथि का प्रारंभ होगा और अगले दिन लगभग 4:15 सायंकाल समाप्त होगा। चतुर्दशी तिथि के प्रारंभ होने के साथ ही जलाभिषेक भी प्रारंभ हो जाएगा। इसके अलावा इसी समय से भद्रा प्रारंभ हो जाएगी लेकिन भद्रा का वास मृत्युलोक में न होने से भद्रा बाधक नहीं होगी।