कुंभनगरी में अखाड़ों के शिविरों में लहरा रही विशाल धर्म ध्वजाएं सभी श्रद्धालुओं के आकर्षण का केंद्र बनी हुई हैं। ये धर्म ध्वजा अखाड़ों के सम्मान का प्रतीक होती है। धर्म ध्वजा की स्थापना के बाद अखाड़ों में कुंभ का आगाज होता है। हर अखाड़े का अपना विशेष ध्वज और चिह्न होते हैं। स्थापना के बाद धर्म ध्वजा की प्रतिदिन आरती और पूजा होती है। महाकुंभ में पेशवाई से पहले सभी अखाड़ों के शिविर में धर्म ध्वजा स्थापित की जाती है। इसकी स्थापना शुभ दिन और शुभ मुहूर्त के आधार पर होती है। धर्म ध्वजा साथ अखाड़ों के इष्टदेव भी प्रतिष्ठित किए जाते हैं। पंचायती अखाड़ा श्री निरंजनी के श्रीमहंत रविंद्र पुरी ने बताया कि अखाड़े में 52 हाथ ऊंची और चारों दिशाओं का संकेत देती धर्म ध्वजाएं स्थापित की गई हैं। निरंजनी अखाड़े की धर्म ध्वजा में 52 बंध लगे हैं। यह 52 मणियों का प्रतीक हैं। श्री पंचायती अखाड़ा महानिर्वाणी के श्रीमहंत रविंद्र पुरी ने बताया कि ध्वज अखाड़ों का प्रतीक हैं। धर्म ध्वज अनादिकाल से सनातन धर्म की पहचान रहे हैं। मुहूर्त निकालकर पूजन के बाद ध्वजारोहण किया जाता है। श्रीमंहत रविंद्र पुरी ने बताया कि शाही स्नान के एक-दो दिन बाद इसे निकाला जाता है।
हरिद्वार कुंभ 2021ः अखाड़ों की आन बान शान हैं धर्म ध्वजाएं, हर अखाड़ा की होती है अलग पहचान
जितेंद्र जोशी, अमर उजाला, हरिद्वार
Published by: Nirmala Suyal Nirmala Suyal
Updated Thu, 25 Mar 2021 02:36 PM IST
सार
- हर अखाड़ा की धर्म ध्वजा की अलग पहचान, स्थापना-विसर्जन के लिए होता है पूजन
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