उत्तराखंड के कर्णप्रयाग क्षेत्र की आराध्य मां उमा देवी को उनके मायके डिम्मर से श्रद्धालुओं ने नम आंखों से ससुराल के लिए विदा किया। उमा देवी की डोली यात्रा छह दिसंबर से गांव में थीं। ग्रामीणों ने देवी को कलेऊ, वस्त्र और आभूषण दिए।
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maa uma devi doli
- फोटो : AmarUjala
बुजुर्ग महिलाओं ने धिसवाले हिटनी उमा तिरवाले हिटनी... और तेरो भाई लाटू तेरी आगवानी... जैसे मांगल गीत गाए। महिलाएं (ध्याणियां) फफक कर रो पड़ीं और माहौल भावुक हो गया। इसके बाद देवी ससुराल कपीरी के लिए विदा हो गईं। शुक्रवार रात्रि विश्राम के लिए उमा देवी की यात्रा न्यू डिम्मर पहुंची।
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डिम्मर गांव को देवी उमा का मायका माना जाता है। मान्यता है कि हर 12 साल में होने वाली दिवारा यात्रा में ससुराल जाने से पहले 15 दिनों के लिए उमा देवी की डोली डिम्मर गांव में रुकती है। शुक्रवार को मां उमा की विदाई के अवसर पर डिम्मर के चौंरी स्थित खांडू देवता के मंदिर में श्रद्धालुओं का जमावड़ा लगा रहा।
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सुबह दस बजे पुजारियों के दल ने मां उमा की पूजा शुरू की। ग्रामीणों ने देवी को सोने की नथ और हार पहनाया। एक घंटे की पूजा के दौरान देवी देवताओं के पश्वा अवतरित हुए और भक्तों को सुफल दिया। दोपहर बारह बजे देवी की डोली को ससुरालियों (कपीरी के ग्रामीण) को सौंपा गया।
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इसके बाद उमा देवी मायके से विदा होने लगीं। भाई लाटू देवता के निशान की अगुवानी में देवी मायके वालों के गले मिलते हुए ससुराल के लिए आगे बढ़ीं। मां उमा की विदाई पर श्रद्धालुओं की आंखें नम हो गईं। इसके बाद देवी एक बजे गांव के खेतों की ओर पहुंची। माना जाता है कि देवी ने इन खेतों में खेती बाड़ी का काम किया होगा।