उत्तराखंड में राजकीय मेडिकल कॉलेज श्रीनगर के मुख्य भवन में घुसा गुलदार दूसरे दिन भी अंदर ही कैद रहा। वन विभाग की टीम ट्रेंक्यूलाइज गन के साथ मौके पर डटी है। हालांकि सोमवार को गुलदार की कोई हलचल नही दिखाई दी। वन विभाग गुलदार को सुरक्षित बाहर निकालने या पिंजड़े में कैद करने की योजना बना रहा है। प्रमुख मुख्य वन संरक्षक (पीसीसीएफ) जयराज ने भी कॉलेज का निरीक्षण कर आवश्यक कदम उठाने के निर्देश दिए।
रविवार सुबह श्रीनगर मेडिकल कॉलेज के फार्माकोलॉजी विभाग के लेक्चर हॉल की गैलरी से गुलदार मुख्य भवन के अंदर घुस गया था। अंदर घुसते समय उसने एक क्लर्क को घायल कर दिया। इसके बाद वह गायब हो गया। दोपहर में उसने कांच का गेट तोड़कर दो सुरक्षाकर्मियों को घायल कर दिया था। वन विभाग की टीम, शूटर्स और पुलिस रातभर गुलदार की ताक में फार्माकोलॉजी विभाग के बाहर बैठी रही। यहां विभाग ने पिंजड़ा लगाया हुआ है। टीम को उम्मीद थी कि भूखा गुलदार कुत्ता खाने आएगा, लेकिन वह आया नहीं। भवन के अंदर उसके चलने की आवाज सुनाई दी, लेकिन वह किसी को नहीं दिखाई दिया।
सोमवार को पीसीसीएफ जयराज ने अधिकारियों के साथ घटनास्थल का निरीक्षणा किया। उन्होंने डीएफओ लक्ष्मण रावत को पिंजड़े को और अंदर रखने को कहा। साथ ही गुलदार के लिए पानी रखने और गेट को ढकने व मनुष्यों की गतिविधियां रोकने को कहा। गुलदार पानी पीने के बाद पिंजड़े में कैद कुत्ते पर हमला कर सकता है। तब वह पिंजड़े में कैद हो जाएगा। डीएफओ लक्ष्मण सिंह ने बताया कि गुलदार को कैमरा व फुट प्रिंट ट्रैप किया जाएगा।
रात के वक्त दरवाजे खोल दिए जाएंगे। गुलदार बाहर निकला या नहीं इसको जानने के लिए कैमरा ट्रैप और फुट प्रिंट ट्रैप किया जाएगा। इसके लिए गेटों के आगे प्लास्टर ऑफ पेरिस डाला जा रहा है। साथ ही गेटों पर कैमरे लगवाए जा रहे हैं। श्रीनगर मेडिकल कॉलेज मुख्य भवन के भूतल में एक गेट पूरी तरह से बंद नहीं होता है। सोमवार को गलती से एक कर्मचारी वहां से अंदर घुस गया। अचानक पुलिस कांस्टेबल शूरवीर सिंह चौहान की नजर उस पर पड़ी।
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- फोटो : अमर उजाला फाइल फोटो
उन्होंने उसको तत्काल बाहर आने को कहा, जब तक वह बाहर नहीं आया। सबकी सांसें अटकी रही। क्योंकि गुलदार ने इसी स्थान के समीप तीनों कर्मचारियों पर हमला कर दिया था। मेडिकल कॉलेज के हॉस्टल में रात के वक्त होने वाला शोरगुल गुलदार के बाहर आने में बाधा बन रहा है। वन विभाग के अनुसार, रात में गुलदार एक बार बाहर गेट पर आया भी था, लेकिन तब तक कोई चिल्ला गया और गुलदार अंदर चला गया। रात में विभाग की टीम चार बार छात्रों को चुप कराने हॉस्टल में गई भी, लेकिन वह नहीं माने।