उत्तराखंड में वैसे तो अनेक रहस्यमयी मंदिर हैं, लेकिन एक देवता ऐसे हैं जो युगों से कैदखाने में बंद हैं और इनका कैदखाना ही इनका मंदिर है।
साल में सिर्फ एक बार वैशाख पूर्णिमा को कुछ घंटों के लिए मंदिर का द्वार खुलता है। यह एक मात्र ऐसे देवता हैं जिनके दर्शन पुजारी भी नहीं कर पाते हैं। क्योंकि मंदिर का द्वार खोलते समय पुजरी के आंखों पर पट्टी बंधी होती है।
कहा जाता है कि रिश्ते में यह देवता भगवान शिव के साले और माता पार्वती के भाई हैं। लेकिन एक गलती के कारण देवी पार्वती ने इन्हें कैद में डाल दिया और तब से यह कैद में रहते हैं। इस देवता का नाम है लाटू देवता।
इस देवता का मंदिर नंदा देवी यात्रा के मार्ग में वांण क्षेत्र में है। लाटू देवता के विषय में ऐसी कथा है कि देवी पार्वती के साथ जब भगवान शिव का विवाह हुआ तो पार्वती जिसे नंदा देवी नाम से भी जाना जाता है। इन्हें विदा करने के लिए सभी भाई कैलाश की ओर चल पड़े। इसमें चचेरे भाई लाटू भी शामिल थे।
मार्ग में लाटू को इतनी प्यास लगी कि पानी के लिए इधर-उधर भटकने लगे। इस बीच लाटू देवता को एक घर दिखा और पानी की तलाश में घर के अंदर पहुंच गए। घर का मालिक बुजुर्ग था। बुजुर्ग ने लाटू देवता से कहा कि कोने में मटका है पानी पी लो।