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Krishna Janmashtami 2020: सालों बाद हो रहा ऐसा, 11 या 12 किस दिन फलदाई होगा व्रत यहां पढ़ें... 

Mon, 10 Aug 2020 04:48 PM IST
अलका त्यागी न्यूज डेस्क, अमर उजाला, ऋषिकेश
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, ऋषिकेश Published by: अलका त्यागी Updated Mon, 10 Aug 2020 04:48 PM IST
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Krishna Janmashtami 2020: Rare Coincidence after many years, Know Vrat Date
- फोटो : अमर उजाला

श्री कृष्ण जन्माष्टमी व्रत को लेकर अगर आपको भी असमंजस है तो चिंता न करें। आपकी परेशानी यहां दूर हो जाएगी। ज्योतिषाचार्यों के अनुसार, इस दिन व्रत गृहस्थ के लिए 11 अगस्त को और साधु महात्माओं के लिए 12 अगस्त को फलदाई योग है। सप्तमी युति होने से परम ऐश्वर्य शाली योग में काफी बरसों बाद इस वर्ष श्री कृष्ण जन्माष्टमी ऐसे मुहूर्त पर आ रही है, जब रोहिणी नक्षत्र का अभाव रहेगा। 

Krishna Janmashtami 2020: Rare Coincidence after many years, Know Vrat Date
- फोटो : अमर उजाला

आचार्य डॉ. चंडी प्रसाद घिल्डियाल ने बताया कि विगत काफी वर्षों से श्री कृष्ण जन्माष्टमी का व्रत दो दिन क्रमश: गृहस्थ एवं वैष्णव के लिए मनाई जाती है। लेकिन इस वर्ष दोनों ही दिन रोहिणी नक्षत्र का अभाव रहेगा और कृतिका नक्षत्र रहेगा। लेकिन 11 अगस्त को प्रात: 8:15 तक सप्तमी और इसके उपरांत अष्टमी तिथि लग जाएगी, जो 12 अगस्त को प्रात: 10:38 तक रहेगी। 

Krishna Janmashtami 2020: Rare Coincidence after many years, Know Vrat Date
- फोटो : अमर उजाला

निशा व्यापिनी अष्टमी होने से 11 तारीख को ही गृहस्ती लोग व्रत रखेंगे। उनके लिए सप्तमी युक्त अष्टमी होने से अति विशिष्ट योग इस दिन बन रहा है। श्रीमद् देवी भागवत पुराण, भविष्य पुराण व विष्णु पुराण के अनुसार कृष्ण पक्ष में सप्तमी संयुक्त अष्टमी को ही व्रत लेना श्रेष्ठ होता है। भगवान कृष्ण का जन्म द्वापर युग में बुधवार अष्टमी तिथि रात्रि 12:00 बजे रोहिणी नक्षत्र में हुआ था। 

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Krishna Janmashtami 2020: Rare Coincidence after many years, Know Vrat Date

इस बार कृतिका नक्षत्र रहेगा लेकिन इस दिन व्रत करने से पारिवारिक लोगों की सभी मनोकामनाएं पूर्ण होंगी। 12 अगस्त को अष्टमी प्रात: 10:38 तक रहेगी उसके बाद नवमी रहेगी शास्त्रानुसार कुटुंब परिवार वाले लोग अष्टमी के पूर्व भाग तथा साधु संत अष्टमी के उत्तरार्ध का व्रत करें तो उनके लिए फलदाई होता है।

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राशि अनुसार जन्माष्टमी व्रत का फल
मेष - राज्य पद प्राप्ति व आकस्मिक धन की प्राप्ति ।
वृष - ऐश्वर्य प्राप्ति।
मिथुन - सभी मनोकामना की पूर्ति ।
कर्क - शत्रु बाधा का निवारण।
सिंह - आरोग्य की प्राप्ति। 
कन्या - दांपत्य सुख प्राप्ति ।

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