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खड़ा दीया अनुष्ठान: संतान कामना के लिए इस मंदिर में 165 दंपतियों ने कराया पंजीकरण, अमेरिका-जर्मनी के भी शामिल

Thu, 07 Nov 2024 03:06 PM IST
रेनू सकलानी संवाद न्यूज एजेंसी, श्रीनगर गढ़वाल
संवाद न्यूज एजेंसी, श्रीनगर गढ़वाल Published by: रेनू सकलानी Updated Thu, 07 Nov 2024 03:06 PM IST
सार

संतान की कामना के लिए 165 दंपतियों ने पंजीकरण कराया। इसमें अमेरिका-जर्मनी के दंपति भी शामिल है। आइए आपको बताते हैं कि उत्तराखंड के पौड़ी गढ़वाल के इस मंदिर की क्या है मान्यता...

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Khada Diya ritual Kamleshwar Mahadev Temple 165 couples registered to have a child including America Germany
कमलेश्वर महादेव मंदिर - फोटो : संवाद न्यूज एजेंसी

विस्तार

14 नवंबर को कमलेश्वर महादेव मंदिर में आयोजित होने वाले खड़ दीया के अनुष्ठान को लेकर मंदिर समिति तैयारियों को अंतिम रूप देने में जुटी है। अब तक अनुष्ठान के लिए 165 दंपतियों ने पंजीकरण कर लिया है। अनुष्ठान के लिए अमेरिका व जर्मनी से भी निसंतान दंपतियों ने पंजीकरण करवाया है।

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सिद्वपीठ कमलेश्वर महादेव मंदिर के महंत आशुतोष पुरी ने कहा कि बैकुंठ चतुर्दशी के अवसर पर मंदिर में होने वाली पूजा के लिए मंदिर समिति द्वारा भव्य तैयारियां की जा रही हैं। मंदिर परिसर में रंग रोगन का कार्य चल रहा है, इसके साथ भक्तों की बढ़ती संख्या की संभावना को देखते हुए बैठने व रोकने के लिए पर्याप्त व्यवस्था की जा रही है।
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दूर-दराज से आने वाले भक्तों के लिए भोजन की व्यवस्था भी मंदिर समिति की ओर से की जाएगी। कहा कि अभी तक 165 लोगों ने मंदिर में पूजा-अनुष्ठान के लिए पंजीकरण करवा लिया है। पंजीकरण करने वालों में प्रदेश के विभिन्न हिस्सों समेत पंजाब, दिल्ली, हरियाणा, उड़ीसा, मध्य प्रदेश समेत कई अन्य राज्यों से दंपति शामिल है। इसके अलावा जर्मनी व अमेरिका से भी एक-एक दंपति खड़ दीया अनुष्ठान में हिस्सा लेंगे। निसंतान दंपति 14 नवंबर तक पंजीकरण कर सकते हैं।

कैसे किया जाता है अनुष्ठान
महिलाओं के कमर में जुड़वा नींबू, श्रीफल, पंचमेवा एवं चावल की पोटली बांधी जाती है। तत्पश्चात सभी दंपतियों के हाथ में दीपक रखते हुए पूजा अर्चना की जाती है। दंपती पूरी रात जलता दीया हाथ में लेकर भगवान शिव (कमलेश्वर) की पूजा करते है। सुबह स्नान के बाद महंत दंपतियों को आशीर्वाद देकर पूजा संपन्न करते हैं। ऐसी मान्यता है कि खड़ा दीया अनुष्ठान करने से दंपतियों को संतान की प्राप्ति होती है।

यह है मान्यता
पौराणिक ग्रंथों के अनुसार, देवता दानवों से पराजित हो गए। तब वह भगवान विष्णु की शरण में गए। दानवों पर विजय प्राप्त करने के लिए भगवान विष्णु यहां भगवान शिव की तपस्या करने आए। पूजा के दौरान वह शिव सहस्रनाम के अनुसार शिवजी के नाम का उच्चारण कर सहस्र (एक हजार) कमलों को एक-एक करके शिवलिंग पर चढ़ाने लगे। विष्णु की परीक्षा लेने के लिए शिव ने एक कमल पुष्प छिपा लिया।

शिव ने दिया था संतान प्राप्ति का वर
एक कमल पुष्प कम होने से यज्ञ मरं कोई बाधा न पड़े, इसके लिए विष्णु ने अपना एक नेत्र निकालकर अर्पित करने का संकल्प लिया। इससे प्रसन्न होकर शिव ने भगवान विष्णु को अमोघ सुदर्शन चक्र दिया। जिससे विष्णु से राक्षसों का विनाश किया। सहस्र कमल चढ़ाने की वजह से इस मंदिर को कमलेश्वर महादेव मंदिर कहा जाने लगा। इस पूजा को एक निसंतान ऋषि दंपति देख रहे थे। मां पर्वती के अनुरोध पर शिव ने उन्हे संतान प्राप्ति का वर दिया। तब से यहां कार्तिक माह के शुक्ल पक्ष की चतुर्दशी (बैकुंठ चतुर्दशी) की रात संतान की मनोकामना लेकर लोग पहुंचते हैं।

मंदिर परिसर से हटा अतिक्रमण

कमलेश्वर महादेव मंदिर जल्द ही अपने भव्य स्वरूप में नजर आएगा। इसके लिए मंदिर परिसर से अतिक्रमण ध्वस्त किया गया है। महंत आशुतोष पुरी ने बताया कि स्थानीय विधायक डॉ. धन सिंह रावत के प्रयासों से मंदिर नए स्वरूप में नजर आएगा। कहा कि प्रशासन के सहयोग से मंदिर क्षेत्र में डेढ़ नाली भूमि से अतिक्रमण हटाया जाना था, जिसमें से एक नाली से अतिक्रमण हटा दिया गया है। यहां मंदिर का भव्य प्रवेश द्वार बनेगा, साथ ही प्रांगण बड़ा होने से भक्तों को दर्शन करने में सुविधा होगी।

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