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केदारनाथ आपदा 2013: खौफनाक थी आपबीती, लाशों के ढेर पर रात काटना... वो मंजर, वो स्याह तस्वीर

Sun, 07 Feb 2021 02:48 PM IST
शाहरुख खान अमर उजाला नेटवर्क, देहरादून
अमर उजाला नेटवर्क, देहरादून Published by: शाहरुख खान Updated Sun, 07 Feb 2021 02:48 PM IST
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kedarnath disaster 2013 horror stories by witness ganesh godiyal
फाइल फोटो - फोटो : अमर उजाला
उत्तराखंड के चमोली जिले के रैनी में रविवार सुबह ग्लेशियर फट गया। बताया जा रहा है कि ग्लेशियर फटने से धौली नदी में बाढ़ आ गई है। इससे चमोली से हरिद्वार तक खतरा बढ़ गया है। इस घटना ने एक बार फिर से करीब पौने आठ साल पहले केदारनाथ धाम में त्रासदी को याद दिला दिया है। आइए जानते हैं उस केदरानाथ में उस रात को क्या हुआ था। 

 
kedarnath disaster 2013 horror stories by witness ganesh godiyal
फाइल फोटो
बदरी केदार मंदिर समिति के तत्कालीन अध्यक्ष गणेश गोदियाल ने अमर उजाला से उस स्याह रात की खौफनाक सच्चाई बयां की थी। उन्होंने बताया कि 17 जून 2013 की शाम को यह सुगबुगाहट शुरू हो गई थी कि केदारनाथ में कुछ अनहोनी हुई है। मगर किसी के पास कोई जानकारी नहीं थी। न सरकार को कुछ पता था, न उसके तंत्र के पास कोई सूचना थी।
 
kedarnath disaster 2013 horror stories by witness ganesh godiyal
फाइल फोटो
कैबिनेट मंत्री डॉ. हरक सिंह रावत 18 जून को केदारनाथ पहुंचे और लौटकर उन्होंने जो कुछ बताया, वह पैरों तले जमीन खिसकाने वाला था। कहा कि मैं तुरंत केदारनाथ जाना चाहता था, लेकिन श्रीनगर में भी आपदा का कहर कुछ कम नहीं टूटा था। क्षेत्रीय विधायक होने के नाते लोगों की यहां भी उम्मीदें थी।
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kedarnath disaster 2013 horror stories by witness ganesh godiyal
फाइल फोटो
केदारनाथ जाने की बेचैनी थी, लेकिन श्रीनगर में राहत कार्यों में 20 जून तक फंसा रह गया। 21 जून वो दिन था, जिस दिन केदारनाथ जाने की स्थिति बनी।
मैं और मेरे साथ मेरे पीआरओ वीरेंद्र नेगी को हेलीकाप्टर से केदारनाथ में ड्राप कर दिया गया। दारुण दुख और खौफनाक मंजर की मिली जुली तस्वीर ने कुछ समय के लिए हमें जड़ कर दिया। हर जगह लाशों के ढेर, हर तरफ मरघट सा माहौल। हम दोनों सीधे मंदिर के गर्भगृह में घुस गए। यहां भी कई शव पडे़ थे।
 
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kedarnath disaster 2013 horror stories by witness ganesh godiyal
फाइल फोटो - फोटो : अमर उजाला
पूरे केदारनाथ में हम दो लोगों के अलावा एक और तीसरा व्यक्ति, जो कि वहां का स्थानीय था मौजूद थे। सबसे पहले गर्भगृह की पवित्रता बहाली का प्रश्न सामने खड़ा था। हम तीनों ने गर्भगृह में रखे शवों को खींचकर बाहर लाना शुरू किया। गर्भगृह की सफाई शुरू की, उन स्थितियों में जितना हमसे हो सकता था, उतनी सफाई की। शाम तक ऐसा ही चलता रहा।
 
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