भगवान केदारनाथ के कपाट भैया दूज के पावन पर्व पर शुक्रवार को शीतकाल के लिए बंद कर दिए गए। केदारनाथ में 1785 श्रद्धालुओं ने बाबा के दर्शन किए। बाबा केदार की पंचमुखी डोली चल विग्रह उत्सव डोली शीतकालीन गद्दीस्थल ओंकारेश्वर मंदिर ऊखीमठ के लिए प्रस्थान करते हुए पहले पड़ाव रामपुर पहुंच गई है।
बंद हुए द्वादश ज्योर्तिलिंगों में शामिल केदारनाथ धाम के कपाट, पावन पल की झलकियां तस्वीरों में...
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बाबा की डोली 11 नवंबर को ओंकारेश्वर मंदिर में विराजमान होगी। केदारनाथ धाम में शुक्रवार तड़के पांच बजे से मंदिर के गर्भगृह में मुख्य पुजारी टी. गंगाधर लिंग ने बाबा केदार की विशेष पूजा-अर्चना शुरू की। भगवान का विशेष श्रृंगार कर भोग लगाया गया। बाद में स्वयंभू लिंग को समाधि रूप देते हुए भष्म से ढककर समाधि पूजा की गई।
प्रात: 6.30 बजे विधि-विधान के साथ गर्भगृह के कपाट बंद कर दिए गए। बाबा केदार की पंचमुखी मूर्ति को चल विग्रह उत्सव डोली में विराजमान किया गया। अन्य धार्मिक औपचारिकताओं को पूरा करते हुए प्रात: 8.30 बजे बीकेटीसी के सीईओ बीडी सिंह सिंह, एसडीएम गोपाल सिंह चौहान, सीओ अभय कुमार सिंह की मौजूदगी में मंदिर के कपाट बंद करते हुए लाख से सील लगाई गई और चॉबी प्रशासन को सौंप दी गई। इस मौके पर मुख्य पुजारी ने कपाट बंद होने की प्रक्रिया के बारे में भी विस्तार से जानकारी दी। इसके उपरांत मंदिर की तीन परिक्रमा करने के बाद बाबा केदार की डोली ने 10-जम्मू-कश्मीर लाइट इनफेंट्री बैंड की धुनों के साथ शीतकालीन गद्दीस्थल ओंकारेश्वर मंदिर ऊखीमठ के लिए प्रस्थान किया।
हर-हर महादेव के जयकारों से गूंज उठी केदारपुरी
केदारनाथ धाम के कपाट बंद होने के दौरान केदारपुरी जय केदार, हर-हर महादेव, जय भैरवनाथ के जयकारों से गूंज उठी। रुद्रा प्वाइंट, लिनचोली, रामबाड़ा, भीमबली, जंगलचट्टी, गौरीकुंड, सोनप्रयाग होते हुए बाबा की डोली दोपहर बाद अपने पहले पड़ाव रामपुर पहुंची। यहां भक्तों व स्थानीय लोगों ने बाबा की डोली का पारंपरिक वाद्य यंत्रों के साथ जोरदार स्वागत किया।
शनिवार 10 नवंबर को बाबा की डोली गुप्तकाशी विश्वनाथ मंदिर में रात्रि प्रवास करेगी और रविवार 11 नवंबर को अपने शीतकालीन गद्दी स्थल ओंकारेश्वर मंदिर में विराजमान होगी। छह माह तक आराध्य अपने भक्तों को यहीं दर्शन देंगे।