जलते अंगारों के कुंड में जैसे ही जाख देवता ने प्रवेश कर नृत्य करना शुरू किया तो पूरी केदारघाटी यक्षराज (जाख देवता) की जयकारों से गूंज उठी। इस अद्भुत दृश्य को देखने के लिए मंदिर परिसर में हजारों श्रद्धालु मौजूद थे। नृत्य के बाद कुंड की पावन राख को श्रद्धालु अपने- अपने घर ले गए।
पहाड़ों की अद्भुत परंपरा, तस्वीरों में देखिए कैसे जलते अंगारों पर नाच उठे देवता
ब्यूरो / अमर उजाला, गुप्तकाशी
Updated Tue, 18 Apr 2017 09:22 AM IST
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