भारतीय सैन्य अकादमी में शनिवार को हुई पासिंग आउट परेड में यद्यपि शारीरिक तौर पर देश के पहले सीडीएस जनरल बिपिन रावत की मौजूदगी न रही, लेकिन उनकी छाया पीओपी में स्पष्ट तौर पर दिखाई दी।
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राष्ट्रपति रामनाथ कोविंद ने भी अपने संबोधन के शुरुआत में ही जनरल रावत का स्मरण कर उन्हें असाधारण नेतृत्वकर्ता बताया तो पासिंग आउट बैच के जेंटलमैन कैडेटों ने भी ड्रिल स्क्वायर पर अकादमी का निशान झुकाकर और बैंड की धुन के साथ राष्ट्रगान गाकर अपने सर्वोच्छ सेनापति को श्रद्धांजलि देकर उनकी मौजूदगी का अहसास कराया। जनरल रावत 16 दिसंबर 1978 को आईएमए से पास आउट होकर गोरखा राइफल्स की पांचवी बटालियन में कमीशंड हुए थे। पीओपी के दिन उन्हें प्रतिष्ठित स्वॉर्ड ऑफ ऑनर भी मिला था। जनरल दलबीर सिंह सुहाग के बाद दिसंबर 2016 में वह थलसेना के 27वें प्रमुख बने और 30 दिसंबर 2019 को देश के पहले चीफ ऑफ डिफेंस स्टाफ नियुक्त हुए।
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सेना के आधुनिकीकरण व मजबूती के लिए उनके योगदान को कभी भुलाया नहीं जा सकता है। इतना जरूर है कि सशत्र सेनाओं के एकीकरण के लिए ‘इंटीग्रेटेड थियेटर कमान’ गठित करने व कुछ अन्य महत्वपूर्ण कार्य करने की उनकी हसरत अधूरी ही रही। इस बार की पीओपी में राष्ट्रपति के साथ ही सीडीएस जनरल रावत को भी मौजूद रहना था, लेकिन काल को कुछ और ही मंजूर था और तीन दिन पहले हेलीकॉप्टर क्रैश में पत्नी सहित वह काल के शिकार हो गए। भले ही जनरल रावत शाररिक तौर पर पीओपी में मौजूद न रहे हों, लेकिन पीओपी में उनकी छाया सेरेमनी के शुरू से लेकर अंत तक रही।
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आईएमए पीओपी
- फोटो : अमर उजाला
इस बार आईएमए में हुई पासिंग आउट परेड में शामिल जेंटलमैन कैडेट नई यूनिफार्म में दिखे। वैसे दिसंबर में आयोजित होने वाली परेड में कैडेटों को हल्के से हरे रंग की अंगोला ड्रेस पहननी पड़ती है। लेकिन इस बार अंगोला की जगह कैडेट नीले रंग की ब्ल्यू पेट्रोल ड्रिल ड्रेस पहनकर परेड में शामिल हुए। बताया गया कि महामहिम राष्ट्रपति रामनाथ कोविंद की मौजूदगी में हुई परेड के लिए ही कैडेटों के लिए यह यूनिफार्म निर्धारित की गई।
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आईएमए पीओपी
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आईएमए से कड़ा सैन्य प्रशिक्षण पूरा करने के बाद अंतिम पग पार करते ही जेंटलमैन कैडेटों के सपने साकार हो जाते हैं। क्योंकि इसके बाद वह बतौर अफसर सेना में नई पारी की शुरुआत करते हैं। इस अवसर पर आर्मी एविएशन कोर के तीन हेलीकॉप्टर भी आसमान से पुष्पवर्षा कर इन युवा सैन्य अफसरों का अभिनंदन करते हैं। लेकिन इस बार राजकीय शोक के चलते अंतिम पग पार करने के दौरान कैडेटों पर पुष्पवर्षा नहीं हुई।
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आईएमए पीओपी
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पासिंग आउट परेड के दिन निरीक्षण अधिकारी (रिव्यूइंग आफिसर) ही सबसे खास व्यक्तित्व होता है। इसलिए अकादमी प्रबंधन मेजबानी में कोई कसर नहीं छोड़ती है। निरीक्षण अधिकारी अक्सर चार घोड़ों वाली बग्घी में सवार होकर द्रोण द्वार से परेड स्थल पर पहुंचते हैं। लेकिन इस बार राष्ट्रपति रामनाथ कोविंद बग्घी के बजाय कार में सवार होकर ही परेड स्थल पहुंचे। बताया गया कि सादगी के लिए राष्ट्रपति बग्घी में बैठकर नहीं आए।
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आईएमए के चैटवुड भवन के सामने ड्रिल स्क्वायर पर आयोजित होने वाली परेड के बाद निजाम पवेलियन में पीपिंग व ओथ सेरेमनी होती है। जहां पर स्वजन अपने लाडलों के कंधों पर पीप्स (सितारे) चढ़ाते हैं और जेंटलमैन कैडेट से लेफ्टिनेंट बनने वाले युवा देश की रक्षा के लिए मर-मिटने की शपथ लेते हैं। उत्सव व जश्न के इस पूरे दृश्य को कैमरों में कैद करने की होड़ लगी रहती। लेकिन इस बार अकादमी प्रबंधन ने पीपिंग व ओथ सेरेमनी इंटरनल आयोजित की। इसमें मीडिया कर्मियों को जाने की अनुमति नहीं थी। कैडेटों के स्वजन, अकादमी के अधिकारी व प्रशिक्षक ही इस कार्यक्रम में शामिल हुए।