नैनीताल की प्राकृतिक संरचना कुछ ऐसी है कि इसमें कंपन से भूस्खलन का खतरा बढ़ जाता है। ऐसे में यदि यातायात को प्रभावी रूप से नियंत्रित नहीं किया गया तो बड़ा भूस्खलन हो सकता है। माल रोड में जहां सड़क कटी है उसका उपचार भी टुकड़ों में संभव नहीं है। यही कारण है कि इस जगह बीते वर्षों में कई बार मरम्मत की गई लेकिन भूधंसाव जारी रहा।
नैनीताल में वाहनों की तादाद न घटी तो मचेगी बड़ी 'तबाही'
यह मानना है जाने माने वरिष्ठ भूवैज्ञानिक प्रो. चारु चंद्र पंत का। कुमाऊं विश्वविद्यालय के भूगर्भ विभाग के प्रोफेसर पंत ने बताया कि जिस स्थान पर माल रोड धंसी है, वहां ब्रिटिश अधिकारियों ने झील की दीवार बनाई थी। इसमें सीमेंट का प्रयोग नहीं किया गया बल्कि विशेष रूप से कटिंग कर पत्थर लगाए गए थे।
झील का स्तर बढ़ने के दौरान पानी का दबाव बढ़ने पर पानी इनके भीतर चला जाता था और बाद में जलस्तर घटने पर वापस झील में आ जाता था। लेकिन इसके साथ थोड़ी मिट्टी भी आ जाती है। इस कारण धीरे-धीरे जमीन खोखली होती गई। अब भूमि लगातार धंस रही है। इसका उपचार सड़क के ऊपर से संभव नहीं है। सतह के नीचे से निर्माण करना होगा।
पंत ने बताया कि आईआईटी रुड़की ने इसके लिए लगभग तीस करोड़ का एक प्रोजेक्ट बनाया है। प्रो. पंत ने बताया कि राजभवन मार्ग की ओर यातायात का दबाव बढ़ना बेहद खतरनाक है। शनि मंदिर के ऊपरी हिस्से में डिग्री कॉलेज के आसपास की चट्टानें कमजोर होने के साथ ही ऐसी हैं जो आपस में जुड़कर बनी हैं।