देवभूमि के बाघों ने आपसी संघर्ष से बचने के लिए ऐसा अनोखा रास्ता निकाला है। अपने इस अनोखे तरीके के बाद बाघों ने जानवरों को भी पीछे छोड़ दिया है।
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यहां बाघों ने आपसी संघर्ष से बचने के लिए निकाला अनोखा रास्ता, इंसानों को छोड़ा पीछे
विजेंद्र श्रीवास्तव/ अमर उजाला, देहरादून
Updated Sun, 30 Jul 2017 09:45 AM IST
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आए दिन संपत्ति विवाद में खून, मार-पिटाई, लड़ाई की खबरें आती रहती हैं। लेकिन अब हम इंसानों को अब जानवरों से सीख लेने की जरूरत है। उत्तराखंड के बाघों का अन्य जगह के रहने वालों बाघों की तुलना में ज्यादा ‘भाईचारा’ है।
corbett tiger reserve
- फोटो : google
वह छोटे इलाके में ही अपनी-अपनी हुकूमत चला रहे हैं। वन विभाग का दावा है कि छोटा क्षेत्र होने के बाद भी अपसी संघर्ष तुलनात्मक तौर पर कम है। उत्तराखंड में कार्बेट पार्क में 208 बाघ और छह शावकों की गिनती कैमरा ट्रैप से हुई है। इस तरह तराई पश्चिमी वृत्त (रामनगर, हल्द्वानी, तराई पूर्वी, तराई केंद्रीय, तराई पश्चिमी वन प्रभाग) में 119 बाघों का वास है।
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tiger stops tourist way in corbett park
कार्बेट पार्क के उप निदेशक अमित वर्मा बताते हैं कि दक्षिण का एक बाघ करीब 10 स्क्वायर किमी एरिया (एक स्क्वायर किमी में 10 हजार हेक्टेयर क्षेत्रफल) में रहता है। इसी तरह अगर साइबेरिया की बात करें तो वहां एक बाघ का 400 स्क्वायर किमी तक का एरिया होता है। जबकि कार्बेट पार्क के बाघ करीब छह स्क्वायर किमी के एरिया में भी आसानी से रह रहे हैं। इसका एक कारण बेहतर वास स्थल और उनके खाने की प्रचुरता होना है।
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- फोटो : google
इसके कारण वह ज्यादा खुश हैं, उनके बीच आपसी संघर्ष के मामले भी कम हैं। अभी कार्बेट पार्क अच्छी-खासी बाघों की संख्या को संभाल सकता है। तराई पश्चिमी वृत्त वन संरक्षक डॉ. पराग मधुकर धकाते के अनुसार हैबीटेड सुधार और सुरक्षा के जो कार्यक्रम चलाए गए थे, उसका लाभ दिखाई दे रहा है। हर तरह के वन्यजीवों की संख्या बढ़ी है।