{"_id":"5bbf485bbdec22501a733a7b","slug":"how-swami-sanand-become-a-saint-to-iit-professor-five-interesting-facts","type":"photo-gallery","status":"publish","title_hn":"दो कमरों की झोपड़ी में रहकर एक प्रोफेसर से संत कैसे बने स्वामी सानंद, पढ़ें 5 बड़ी बातें","category":{"title":"City & states","title_hn":"शहर और राज्य","slug":"city-and-states"}}
दो कमरों की झोपड़ी में रहकर एक प्रोफेसर से संत कैसे बने स्वामी सानंद, पढ़ें 5 बड़ी बातें
Fri, 12 Oct 2018 09:11 AM IST
न्यूज डेस्क/अमर उजाला, हरिद्वार
न्यूज डेस्क/अमर उजाला, हरिद्वार
Updated Fri, 12 Oct 2018 09:11 AM IST
विज्ञापन
1 of 5
swami sanand
खबरें लगातार पढ़ने के लिए अमर उजाला एप डाउनलोड करें
या वेबसाइट पर पढ़ना जारी रखने के लिए वीडियो विज्ञापन देखें
आईआईटी के प्रोफेसर से संत बनने तक स्वामी सानंद ने कैसे जीवन में संघर्ष किया यहां जानिए उनके बारे में सब कुछ....पर्यावरणविद् प्रो. जीडी अग्रवाल ने 20 जुलाई 1932 को उत्तर-प्रदेश के मुजफ्फरनगर जिले के कांधला कस्बे में किसान परिवार में जन्म लिया था। उन्होंने कांधला में प्राथमिक और माध्यमिक विद्यालयों में पढ़ाई करने के बाद रुड़की विवि (आईआईटी रुड़की) से सिविल इंजीनियरिंग में स्नातक की उपाधि प्राप्त की।
2 of 5
swami sanand
उन्होंने उत्तर प्रदेश राज्य सिंचाई विभाग में डिजाइन इंजीनियर के रूप में काम की शुरुआत की। इसके बाद उन्होंने बर्कले में कैलिफोर्निया विवि से पर्यावरण इंजीनियरिंग में पीएचडी की उपाधि प्राप्त की। शिक्षा प्राप्त कर उन्होंने मध्य प्रदेश के चित्रकूट में महात्मा गांधी चित्रकूट ग्रामोड़ा विद्यालय में पर्यावरण विज्ञान के मानद प्रोफेसर के रूप में भी पढ़ाया।
3 of 5
swami sanand
वे आईआईटी कानपुर के सिविल इंजीनियरिंग और पर्यावरण विभाग में हेड भी रहे। वे केंद्रीय प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड में वर्ष 1979-80 में प्रथम सचिव और राष्ट्रीय नदी संरक्षण निदेशालय के सलाहकार भी रहे। वे रुड़की विवि में पर्यावरण इंजीनियरिंग के लिए अतिथि प्रोफेसर भी रहे थे। फिलहाल महात्मा गांधी चित्रकूट ग्रामोदय विश्वविद्यालय में पर्यावरण विज्ञान के मानद प्राध्यापक (ऑनरेरी प्रोफेसर) थे।
विज्ञापन
विज्ञापन
4 of 5
स्वामी सानंद को पुलिस ने जबरन उठाया
- फोटो : अमर उजाला
वे देश की पर्यावरणीय गुणवत्ता में सुधार के लिए नीति बनाने और प्रशासनिक तंत्र को आकार देने वाली विभिन्न सरकारी समितियों के सदस्य भी रहे। सेंटर फॉर साइंस एंड एनवायरनमेंट नई दिल्ली के अग्रणी संस्थापक थे। 2002 में आईआईटी कानपुर में उनके पूर्व छात्रों ने उन्हें सर्वश्रेष्ठ शिक्षक पुरस्कार प्रदान किया। उन्होंने अपने प्रयास से उत्तराखंड में गंगा नदी पर बन रही कई परियोजनाओं के निर्माण को रुकवाया।
विज्ञापन
5 of 5
swami sanand
वे जुलाई 2011 में एक हिंदू संन्यासी बन गए और उन्हें स्वामी ज्ञान स्वरूप सानंद सरस्वती के नाम से जाना गया। मध्य प्रदेश में चित्रकूट में दो कमरे की झोपड़ी में गांधीवादी जीवनशैली में रहते थे। वह स्वयं फर्श को साफ करने के साथ अपने कपड़े भी स्वयं धोते थे। साथ ही अपना भोजन भी स्वयं बनाते थे। वे हाथ से बुने खादी कपड़े ही पहनते थे।
रहें हर खबर से अपडेट, डाउनलोड करें Android Hindi News App, iOS Hindi News App और Amarujala Hindi News APP अपने मोबाइल पे| Get all India News in Hindi related to live update of politics, sports, entertainment, technology and education etc. Stay updated with us for all breaking news from India News and more news in Hindi.
विज्ञापन
विज्ञापन
एड फ्री अनुभव के लिए अमर उजाला प्रीमियम सब्सक्राइब करें
Next Article
Disclaimer
हम डाटा संग्रह टूल्स, जैसे की कुकीज के माध्यम से आपकी जानकारी एकत्र करते हैं ताकि आपको बेहतर और व्यक्तिगत अनुभव प्रदान कर सकें और लक्षित विज्ञापन पेश कर सकें। अगर आप साइन-अप करते हैं, तो हम आपका ईमेल पता, फोन नंबर और अन्य विवरण पूरी तरह सुरक्षित तरीके से स्टोर करते हैं। आप कुकीज नीति पृष्ठ से अपनी कुकीज हटा सकते है और रजिस्टर्ड यूजर अपने प्रोफाइल पेज से अपना व्यक्तिगत डाटा हटा या एक्सपोर्ट कर सकते हैं। हमारी Cookies Policy, Privacy Policy और Terms & Conditions के बारे में पढ़ें और अपनी सहमति देने के लिए Agree पर क्लिक करें।