नवरात्र पर्व का सिर्फ धार्मिक महत्व ही नहीं है बल्कि यह मानसिक स्वास्थ्य के लिए अमृत का काम करता है। यह बात कोई धार्मिक संकल्पना नहीं बल्कि वैज्ञानिक तथ्यों पर आधारित है। जाने माने मनोचिकित्सक और पैरासाइकोलॉजी के विशेषज्ञ डॉ. नंदकिशोर ने अपने 35 साल के अनुभव के आधार पर यह दावा जताया है।
उन्होंने कहा कि नवरात्र के दिनों में मनोरोगों के मरीजों की संख्या कम हो जाती है। इसके साथ ही ऐसे रोगियों में रोग से लड़ने की क्षमता कई गुना बढ़ जाती है।
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डॉ. नंदकिशोर
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मनोचिकित्सक डॉ. नंदकिशोर का कहना है कि हमारे जीवन में तनाव, दबाव, अस्थिरता, अनिश्चितता बहुत बढ़ गई है। हमारी आर्थिक-वित्तीय नीति पूरी तरह से बाजार आधारित हो गई है। इसके साथ ही हमारे समाज की सबसे मजबूत इकाई परिवार का स्वरूप भी बदल गया है।
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नवरात्रि का महत्व
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संयुक्त परिवारों का खत्म होना और न्यूक्लियर फैमिली का स्ट्रक्चर भी माइक्रो न्यूक्लियर फैमिली जैसा होने से एकाकीपन बढ़ा है। उन्होंने कहा कि नवरात्र जैसे पवित्र उत्सव व्यक्ति व समाज में सकारात्मक, रचनात्मक व बेहद गहरी ऊर्जा प्रवाहित करते हैं। नवरात्र जैसे उत्सव अवसाद समेत तमाम मनोवैज्ञानिक रोगों की ताकत को कम करते हैं।
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navratri
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यह अनुभवजन्य है कि इस पावन अवसर पर व्यक्ति आशा, उम्मीद, उत्साह और सकारात्मकता से भर जाता है। हर तरफ सकारात्मक ऊर्जा का प्रवाह होता है। यह वैज्ञानिक तथ्य है कि नवरात्र समेत तमाम बड़े उत्सवों के पावन अवसर व्यक्ति के शरीर व मन में सकारात्मक हारमोनल बदलाव होते हैं।