चमत्कार के बारे में सुना था, लेकिन मैंने केदारनाथ में इसे साक्षात होते देखा है। जब मौत रूह को छूकर निकल गई और पायलट के रूप में बाबा केदार ने सबको बचा लिया। कुछ देर के लिए तो मेरा दिमाग शून्य हो गया था और शरीर ठंडा पड़ गया था, लेकिन बाबा की कृपा से जीवनदान मिल गया, जो हमेशा याद रहेगा।
ये शब्द तमिलनाडु निवासी शिवाजी के हैं, जो इमरजेंसी लैंडिंग करने वाले हेलिकॉप्टर में अन्य पांच यात्रियों के साथ सवार थे। शिवाजी ने अमर उजाला के साथ खास बातचीत में उस खौफनाक मंजर को बयां करते हुए कहा, मैं तीसरी बार बाबा केदार के दर्शन के लिए आया था। 23 मई को चार साथियों संग केदारनाथ यात्रा पर फाटा पहुंचा था। वहां से 24 मई को सुबह 5.30 बजे ही शेरसी हैलीपैड पर पहुंच गए थे।
करीब सात बजे हेलिकॉप्टर में छह यात्री सवार हुए, जिसमें पांच हम थे। हेलिकॉप्टर ने जैसे ही उड़ान भरी तो बाबा केदार के दर्शनों के लिए धाम पहुंचने को लेकर सभी का उत्साह चरम पर पहुंच गया था, लेकिन केदारनाथ हैलीपैड पर लैंड करने से कुछ पल पहले से लेकर ढलान वाली जगह पर इमरजेंसी लैंडिंग के बीच जो कुछ हुआ, उसकी कभी कल्पना भी नहीं की जा सकती।
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केदारनाथ हेलिकॉप्टर हादसा
- फोटो : संवाद न्यूज एजेंसी
हैलीपैड तक पहुंचा हेलिकॉप्टर अचानक जब ऊपर उठने लगा और चक्कर लगाने लगा तो लगा कि अब सब खत्म हो गया है। हेलिकॉप्टर में साथ बैठे साथियों को देखना तो दूर आंखें खुली थीं या बंद, यह भी पता नहीं है।
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केदारनाथ हेलिकॉप्टर हादसा
- फोटो : संवाद न्यूज एजेंसी
हेलिकॉप्टर का पिछला हिस्सा, मिट्टी में टकराया और सीधे ऊपर मुड़ कर जमीन पर टिक गया, जिससे जोर का झटका लगा। तब, ऐसा लगा कि हेलिकॉप्टर के दरवाजे खुलने वाले हैं और हम सभी बाहर गिर जाएंगे।
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केदारनाथ हेलिकॉप्टर हादसा
- फोटो : संवाद न्यूज एजेंसी
शरीर ठंडा पड़ गया था और प्राण सूख रहे थे। आज तक चमत्कार के बारे में सुना था, लेकिन केदारनाथ में प्रत्यक्ष देखा। बाबा केदार के रूप में पायलट ने मौत को मात देकर बचा लिया। पायलट कल्पेश ने जिस तरह से स्वयं को शांत रखते हुए पूरी तरह से अनियंत्रित हो चुके हेलिकॉप्टर को नियंत्रित कर लैंड कराया, वह हमारी सोच से परे था। शायद, बाबा ने पायलट को अपने सुरक्षा कवच में ले लिया, जिससे वह यह सब कर पाए।
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केदारनाथ धाम
- फोटो : संवाद न्यूज एजेंसी
कुछ देर बाद हेली कंपनी के कर्मचारियों ने हमें हेलिकॉप्टर से बाहर निकाला। उस क्षण को मैं शब्दों में बयां नहीं कर सकता। हम, सभी छह यात्री कांप रहे थे, चेहरे की रंगत फीकी पड़ी हुई थी, लेकिन पायलट के चेहरे पर कोई शिकन नहीं थी। उनके चेहरे पर एक संतोष था कि उन्होंने बाबा केदार के भक्तों को बचा लिया है। पुलिस और अन्य हमें मंदिर में लेकर गए। बाबा केदार की कृपा से मिले जीवनदान को हमेशा याद रखूंगा।