उत्तराखंड के उत्तरकाशी में आपदाग्रस्त आराकोट क्षेत्र के गांवों में राहत सामग्री पहुंचाने के दौरान शुक्रवार को एक हेलीकॉप्टर क्रैश होते-होते बचा। आराकोट से चिवां गांव के लिए राहत सामग्री लेकर उड़े हेलीकॉप्टर की नगवाड़ा टिकोची के पास नदी किनारे आपात लैंडिंग करानी पड़ी। इस हादसे में पायलट कैप्टन सुशांत कुमार सिर पर चोट लगने से घायल हो गए, जबकि इंजीनियर पूरी तरह सुरक्षित हैं। वहीं चार दिन में दो हादसे होने के बाद अब यहां हेलीकॉप्टर सेवा अस्थायी रूप से बंद कर दी गई है।
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उत्तरकाशी में हेलकॉप्टर की इमरजेंसी लैंडिंग
- फोटो : अमर उजाला
बता दें कि बीते 21 अगस्त को आराकोट क्षेत्र के आपदाग्रस्त मोल्डी गांव में राहत सामग्री पहुंचाने के दौरान हैरिटेज एविएशन कंपनी का एक हेलीकॉप्टर क्रैश हो गया था। इस हादसे में पायलट एवं इंजीनियर समेत तीन लोगों की मौत हो गई थी। इस हादसे के बाद क्षेत्र में हेलीकॉप्टर से राहत एवं बचाव कार्य बंद कर दिए गए थे।
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उत्तरकाशी में हेलकॉप्टर की इमरजेंसी लैंडिंग
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शुक्रवार को एक बार फिर आर्यन एविएशन कंपनी के हेलीकॉप्टर की मदद से प्रभावित गांवों में रसद पहुंचाने का कार्य शुरू किया गया। इस हेलीकॉप्टर ने आराकोट से दो राउंड लगाकर चिवां गांव राहत सामग्री पहुंचायी। तीसरे राउंड में यह राहत सामग्री लेकर चिवां गांव के लिए उड़ा तो दोपहर करीब सवा बारह बजे नगवाड़ा टिकोची के पास इसकी इमरजेंसी लैंडिंग करानी पड़ी।
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उत्तरकाशी में हेलकॉप्टर की इमरजेंसी लैंडिंग
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बताया जा रहा है कि नगवाड़ा के पास बगीचे से सड़क तक सेब पहुंचाने के लिए लगी ट्राली के तार सामने आने पर पायलट ने इन तारों में उलझने से बचने के लिए हेलीकाप्टर को डाउन कर वहां नदी के किनारे उतार दिया। यहां भारी बोल्डरों पर हेलीकॉप्टर उतरने से पायलट कैप्टन सुशांत कुमार जाना निवासी जबलपुर मध्यप्रदेश के सिर पर आंख के पास गंभीर चोट आई और खून बहने लगा। हालांकि साथ में मौजूद इंजीनियर अजीत सिंह पूरी तरह सुरक्षित रहे। हेलीकॉप्टर को भी काफी नुकसान पहुंचा है।
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उत्तरकाशी में हेलकॉप्टर की इमरजेंसी लैंडिंग
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आसपास मौजूद ग्रामीणों ने तत्काल मौके पर पहुंचकर घायल पायलट को हेलीकॉप्टर से बाहर निकाला। प्रत्यक्षदर्शियों के मुताबिक पायलट ने सूझबूझ का परिचय देकर हेलीकॉप्टर को क्रैश होने से बचा लिया, अन्यथा बड़ा हादसा हो सकता था। सूचना मिलते ही एसडीआरएफ की रेस्क्यू टीम भी मौके पर पहुंच गई। घायल पायलट को कुछ दूरी तक पीठ पर ढोकर और फिर एंबुलेंस की मदद से सड़क मार्ग से आराकोट पहुंचाया गया। यहां प्राथमिक उपचार देकर पायलट और इंजीनियर को उत्तराखंड सरकार के हेलीकॉप्टर की मदद से देहरादून भेज दिया गया।