शनिवार को हुई बर्फबारी पर्यटकों के लिए आफत बनी। जगह-जगह सड़कों पर लगे जाम में फंसे 500 पर्यटकों को देर रात तक प्रशासन ने आईटीबीपी की मदद से सुरक्षित स्थानों पर पहुंचाया। जाम की स्थिति इतनी भयंकर थी कि पर्यटकों को सड़कों पर ही खाने पीने की वस्तुएं वितरित करनी पड़ी। शनिवार देर रात करीब साढ़े तीन बजे तक पर्यटकों को निकालने का अभियान चलता रहा। वहीं ठंड से कंपनी गार्डन की झील जम गई।
शनिवार को मसूरी और इसके आसपास हुई बर्फबारी में पर्यटक सुबह से तो उत्साहित थे, लेकिन शाम होते-होते यह उत्साह मायूसी में बदल गया। मसूरी के विभिन्न संपर्क मार्गों पर भयंकर जाम की स्थिति बन गई। इससे प्रशासन की भी सांसे फूल गई। आनन-फानन में अपर जिलाधिकारी प्रशासन रामजी शरण शर्मा और वित्त एवं राजस्व बीर सिंह बुदियाल के नेतृत्व में टीम को विभिन्न क्षेत्रों के लिए भेजी।
रास्ते में प्रशासनिक टीम को पता चला कि बासा घाट पर ज्यादा पर्यटक फंसे हुए हैं। प्रशासन ने आईटीबीपी और पुलिस की मदद से पर्यटकों को निकालना शुरू किया। एडीएम रामजी शरण शर्मा ने बताया देर रात करीब एक बजे से रेस्क्यू अभियान शुरू किया गया था। जेसीबी आदि की मदद से सड़कों से बर्फ हटाई गई।
इस दौरान पर्यटकों को मौके पर खाने के पैकेट वितरित किए गए। मसूरी से आगे बासा घाट और इसके आसपास से 500 पर्यटकों को सुआखोली, बुरांस खंडा आदि सुरक्षित जगहों पर ले जाया गया। राष्ट्रीय राजमार्ग के अधिशासी अभियंता की उपस्थिति में जेसीबी से विभिन्न मार्गों से बर्फ हटाई। उसके बाद चूना और नमक का छिड़काव किया गया।
देर रात तक प्रशासन ने जैसे-तैसे पर्यटकों को जाम से निकाला, लेकिन सुबह स्थिति और भयावह हो गई। देर रात शुरू हुई ओलावृष्टि से सड़कों पर फिसलन बढ़ गई। धनोल्टी मार्ग पर वाहनों को रोक दिया गया। प्रशासन, आईटीबीपी, पुलिस और एसडीआरएफ के लगभग 1000 से ज्यादा अधिकारी और जवानों को मसूरी व उसके आसपास के इलाकों में तैनात किया गया है। ताकि, समय रहते कोई भी रेस्क्यू किया जा सके।