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Haridwar Kumbh Mela 2021 : हरिद्वार ही एकमात्र ऐसा कुंभ नगर जहां कुंभस्थ होते हैं देवगुरु बृहस्पति

Tue, 19 Jan 2021 10:09 AM IST
Nirmala Suyal Nirmala Suyal न्यूज़ डेस्क, अमर उजाला, हरिद्वार
न्यूज़ डेस्क, अमर उजाला, हरिद्वार Published by: Nirmala Suyal Nirmala Suyal Updated Tue, 19 Jan 2021 10:09 AM IST
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Haridwar Kumbh Mela 2021 news : Haridwar is only Kumbh city where devaguru brhaspati Kumbhastha
हरिद्वार कुंभ मेला - फोटो : amar ujala

कुंभ महापर्वों का संबंध देवगुरु बृहस्पति और जगत आत्मा सूर्य के राशि परिवर्तन से जुड़ा है। लेकिन जिस कुंभ राशि से कुंभ पर्व मुख्य रूप से जुड़ा है उस राशि में बृहस्पति केवल हरिद्वार कुंभ में ही प्रवेश करते हैं। प्रयागराज, उज्जैन और नासिक में बृहस्पति कुंभस्थ नहीं होते।

Haridwar Kumbh Mela 2021 news : Haridwar is only Kumbh city where devaguru brhaspati Kumbhastha
हरिद्वार कुंभ मेला - फोटो : amar ujala

हरिद्वार में गुरु के कुंभस्थ होने के कारण माना जाता है कि चारों कुंभ नगरों में कुंभ का पहला महापर्व हरिद्वार में पड़ा था। उसी के बाद अन्य कुंभ नगरों में कुंभ शुरू हुए। शास्त्रों के मुुताबिक जिस समय चार नगरों में कुंभ कलश छलके, उस समय कलश की सुरक्षा बृहस्पति और सूर्य के जिम्मे थी। ये दोनों ग्रह राशियों के हिसाब से चारों कुंभ नगरों में कुंभ का कारण बने।

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हरिद्वार कुंभ मेला - फोटो : amar ujala

बृहस्पति को कुंभ राशि में आने का परम मुहूर्त सौभाग्य केवल हरिद्वार में प्राप्त हुआ। हरिद्वार ही एकमात्र ऐसा कुंभ नगर है जहां बृहस्पति के कुंभ और सूर्य के मेष राशि में आने पर कुंभ महापर्व और मेला लगता है। शाही स्नान होते हैं। जबकि प्रयाग में बृहस्पति के वृष और सूर्य के मकर राशि में आ जाने पर कुंभ पर्व का महायोग आता है।

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Haridwar Kumbh Mela 2021 news : Haridwar is only Kumbh city where devaguru brhaspati Kumbhastha
हरिद्वार कुंभ मेला - फोटो : amar ujala

इसी प्रकार उज्जैन कुंभ मेला तब होता है जब बृहस्पति का आगमन सिंह और सूर्य का प्रवेश मेष राशि में हो जाए। नासिक में भी बृहस्पति के सिंह और सूर्य के भी सिंह राशि में पर कुंभ का मेला लगता है। सूर्य जहां बारह महीनों में सभी बारह राशियों की यात्रा पूरी कर लेते हैं, वहीं बृहस्पति को एक राशि से दूसरी में जाने में बारह वर्ष लगते हैं।

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हरिद्वार कुंभ मेला - फोटो : amar ujala

यही कारण है कि कुंभ मेला एक स्थान पर बारह वर्ष बाद आता है। यहां यह भी खास है कि उज्जैन और नासिक के कुंभ मेले करीब एक वर्ष में ही होते हैं। खगोलीय गणित और राशि प्रवेश पर निर्भर कुंभ मेला केवल हरिद्वार में ही कुम्भस्थ होता है। प्रयाग कुंभ को वृषस्थ, उज्जैन और नासिक कुंभ मेलों को सिंहस्थ कहते हैं। कुंभस्थ होने के कारण हरिद्वार कुंभ को ही पहला कुंभ माना जाता है।

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