हल्द्वानी में रेलवे भूमि पर अतिक्रमण के मामले में सुप्रीम कोर्ट ने गुरुवार को बड़ा फैसला सुनाया। सुप्रीम कोर्ट ने नैनीताल हाईकोर्ट के फैसले पर रोक लगा दी है। जिससे यहां करीब चार हजार परिवारों को फिलहाल राहत मिली है। सुप्रीम कोर्ट ने रेलवे को भी नोटिस जारी किया है। अब सात फरवरी तक अतिक्रमण नहीं हटाया जाएगा। मामले में अगली सुनवाई सात फरवरी को होगी।
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Haldwani Case: रेलवे ट्रैक किनारे 40 साल पहले शुरू हुई थी बसावट, 10 बिंदुओं में जानें अब तक की पूरी कहानी
Thu, 05 Jan 2023 05:36 PM IST
अलका त्यागी
संवाद न्यूज एजेंसी, हल्द्वानी
संवाद न्यूज एजेंसी, हल्द्वानी
Published by: अलका त्यागी
Updated Thu, 05 Jan 2023 05:36 PM IST
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हल्द्वानी में विरोध प्रदर्शन
- फोटो : अमर उजाला
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हल्द्वानी में विरोध प्रदर्शन
- फोटो : अमर उजाला
- यहां बसे 40 हजार लोगों का इतिहास करीब 40 साल पुराना है। रेलवे की जिस भूमि पर अतिक्रमण है वहां इस समय 4365 परिवार निवास कर रहे हैं। जिसमें करीब 40 हजार लोग रहते हैं। अतिक्रमण के दायरे में दो इंटर कॉलेज, दो प्राइमरी स्कूल, एक जूनियर हाईस्कूल है। एक प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्र भी रेलवे की जमीन पर अतिक्रमण कर बनाया गया है। चार मदरसों के साथ ही कई धार्मिक स्थल भी चिह्नीकरण के दायरे में हैं। दो ओवरहेड टैंक भी इस जमीन पर बनाए गए हैं। इसके अलावा 15 मस्जिदें, गोपाल मंदिर और दुर्गा मंदिर समेत पांच छोटे-बड़े मंदिर अतिक्रमण की जद में आ रहे हैं।
- 40 साल पहले अलग-अलग धंधों की तलाश में लोग यहां बसे, और बसते चले गए तो यहां का भूगोल भी बदलता गया। सपाट जमीन धीरे-धीरे बस्ती में तब्दील होने लगी, तो फिर यहां पानी की लाइन और बिजली के पोल भी लगने लगे।
हल्द्वानी रेलवे प्रकरण
- फोटो : अमर उजाला
- फिर बारी आई राशन कार्ड, वोटर कार्ड बनने की और धीरे-धीरे यहां का भूगोल पूरी तरह बदल गया। रेलवे ट्रैक का किनारा अब एक बस्ती का रूप ले चुका है। यहां लोग बसे तो शहर में चुनाव का गणित भी बदलने लगा।
- 40 हजार की आबादी में सैकड़ा, हजार होते हुए वोटरों की संख्या करीब 15 हजार तक पहुंच गई। जब राशन कार्ड के बाद वोटर कार्ड बने और लोगों ने वोट डालना शुरू किया तो यह जगह पूरी तरह से बस्ती में बदल गई।
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- फोटो : अमर उजाला
- अतिक्रमित रेलवे भूमि पर 4500 बिजली कनेक्शन हैं। ऊर्जा निगम ने करीब नौ महीने पहले अतिक्रमित क्षेत्र से बिजली आपूर्ति के तार, बिजली के पोल, ट्रांसफार्मर हटाने के लिए 80 लाख का प्रस्ताव भेजा था।
- इसके बाद रेलवे स्टेशन की भूमि से कब्जा खाली कराने के लिए डेढ़ दशक पहले वृहद स्तर पर अभियान चलाया गया था। पूरे इलाके को छावनी में बदल दिया गया था। दो दिन तक चले अभियान में काफी बड़े इलाकों को खाली कराने में सफलता मिली थी। कब्जा हटाने के दौरान लोगों के घरों के नीचे से रेलवे की पटरी तक निकली थी। बाद में अधिकारियों की ढिलाई के चलते पुन: रेलवे की जमीन पर कब्जा हो गया।
- उस समय कब्जा हटाने के दौरान पुलिस व प्रशासन को लोगों के तीखे विरोध का सामना करना पड़ा था। पर संगठित प्रयास और समन्वय के चलते रेलवे भूमि पर कब्जा खाली कराने में सफल हुआ था, उस दौरान राजपुरा क्षेत्र में कुछ कब्जा हटाया गया।
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हल्द्वानी रेलवे प्रकरण
- फोटो : अमर उजाला
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कब्जा हटाने की कार्रवाई के दौरान कुछ लोग विरोध जताने के लिए पानी की टंकी पर चढ़ गए थे जिन्हें बमुश्किल समझाकर उतारा गया था। बाद में प्रदर्शनकारी विरोध स्वरूप नैनीताल रोड पर उतर आए थे और डीएम कैंप कार्यालय को घेर लिया था। इसके बाद कार्रवाई रोक दी गई।
- फिर गौलापार निवासी आरटीआई कार्यकर्ता रवि शंकर जोशी ने हाईकोर्ट में अतिक्रमण हटाने को लेकर याचिका दायर की थी। 20 दिसंबर को हाईकोर्ट ने इस बार रेलवे अतिक्रमण खाली कराने को लेकर जो स्प्ष्ट दिशा-निर्देश दिए उससे साफ है कि इसमें कोताही की कोई गुंजाइश नहीं है।
- इसके लेकर लोग अपना आशियाना बचाने के लिए लगतार धरना प्रदर्शन कर रहे थे। सुबह से शाम तक दुआओं का दौर जारी था। वहीं, अब सुप्रीम कोर्ट से लोगों को आंशिक राहत मिली।