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भारतीय संस्कृति के प्रसार में लगा सात समुद्र पार से आया ये जोड़ा

Fri, 04 Nov 2016 12:23 PM IST
मनोज सिंह राणा/ अमर उजाला, ऋषिकेश
मनोज सिंह राणा/ अमर उजाला, ऋषिकेश Updated Fri, 04 Nov 2016 12:23 PM IST
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German couple spread out indian culture
manfret lawrence - फोटो : amar ujala

‘हमने कभी नहीं सोचा था कि 24 साल पहले की चारधाम यात्रा हमारे लिए इतनी सुखद होगी। विषम परिस्थितियों में भी भगवान के दर्शन करने के बाद भी भारतीयों के खिले चेहरे देख मन बहुत आनंदित हुआ। सोचा ऐसा क्या है भारतीय संस्कृति में जो लोग इतने खुश हैं, इसी खुशी को जानने के लिए हर बार तीर्थनगरी ऋषिकेश घूमने आते हैं, हम अब तक 39 बार तीर्थनगरी ऋषिकेश आ चुके हैं।’ यह कहना है जर्मन दंपति मेनफ्रेट लॉरेंस और उनकी पत्नी क्रिस्टा लॉरेंस का।

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चार धाम यात्रा

जर्मन दंपति ने बताया कि वर्ष 1972 से योग साधना में लीन होने के कारण वर्ष 1992 में पहली बार योगनगरी ऋषिकेश आए। यहां से वे चारधाम यात्रा पर निकले। बारिश के कारण यात्रा मार्ग जगह-जगह बंद पड़े थे। सड़क अवरुद्ध होने से सैकड़ों लोग अलग-अलग स्थानों फंसे हुए थे। हमें लगा कि मुश्किल में फंस गए हैं, लेकिन अन्य सभी लोगों के चेहरों पर खुशी थी। इस यात्रा ने हमारा हृदय परिवर्तन कर दिया। तब भारतीय संस्कृति से रूबरू होने का पहला अवसर मिला।
 

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yoga

भारतीय संस्कृति से ओतप्रोत होकर मांसाहारी भोजन त्याग दिया। यही नहीं वह जर्मनी में भी अपने योग साधकों को मांसाहारी भोजन से परहेज करवा रहे हैं। बताया कि अब तक करीब 500 लोगों को मांसाहार से परहेज करवा चुके हैं। उन्होंने बताया कि जर्मनी में 90 फीसदी आबादी मांसाहारी है, यही नहीं जो योग करते हैं, वह भी भोजन में मांसाहार लेते हैं, लेकिन भारत की यात्रा करने के बाद से उन्होंने मांसाहारी भोजन से परहेज कर दिया है।

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yoga

बताया कि इससे सैकड़ों साधकों में जागरुकता आई और उन्होंने अपने भोजन में मांसाहार को दूर कर दिया। उन्होंने कहा कि जो योग साधक विभिन्न यौगकि मुद्राएं करने के बाद भी अपने भोजन में मांसाहार को शामिल करता है, उसके लिए योग सीखना व्यर्थ है। योगसाधक बनने के लिए साधक को मांसाहार का त्याग करना होगा।

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केदारनाथ - फोटो : AmarUjala

जर्मन दंपति ने बताया कि वह उत्तराखंड में चार बार बाबा केदारनाथ, एक बार बदरीनाथ, चार बार गोमुख, एक बार यमुनोत्री धाम के दर्शन कर चुके हैं, यही नहीं वह फूलों की घाटी, नीलकंठ, तुंगनाथ, चौबता, मसूरी समेत कई पर्यटक स्थलों की यात्रा कर चुके हैं। यह यात्राएं उनके लिए अविस्मरणीय हैं।

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