गौरीकुंड में हादसे के बाद प्रशासन ने गौरीकुंड बाजार से लेकर डाटपुल से आगे एक किमी क्षेत्र में बनाई गई कच्ची दुकानों को खाली कर मशीन से ध्वस्त करना शुरू कर दिया है। पहले चरण में यहां 40 दुकानों को ध्वस्त किया गया है। बाकी दुकानदारों को भी तुरंत दुकानें खाली करने का अल्टीमेटम दिया गया है। प्र
Gaurikund landslide: हाईवे किनारे बनाई गई अस्थाई 40 दुकानों को प्रशासन ने किया ध्वस्त, 150 और हटाई जाएंगी
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प्रशासन का कहना है कि सभी दुकानें केदारनाथ यात्रा को लेकर बनाई गईं थीं। लेकिन किसी भी दुकान निर्माण की प्रशासन से कोई अनुमति नहीं है। इसलिए अवैध अतिक्रमण मानते हुए इन दुकानों को ध्वस्त किया जा रहा है। उन्होंने बताया कि गौरीकुंड से सोनप्रयाग से 190 से अधिक कच्ची दुकानें चिह्नित की गई हैं, जो हाईवे के निचली व ऊपरी तरफ बनाई गई हैं।
वहीं, प्रभावित दुकानदार राजेश रावत, संदीप रावत, सौरभ राणा, अनिल राणा आदि का कहना है कि प्रशासन ने उन्हें बिना सूचित किए कार्रवाई की है, जिस कारण वह सामान भी अफरा-तरफी में समेट रहे हैं।
अब, इस सामान को लेकर वह सीधे लाला के पास जाएंगे, अगर सामान वापस हो गया तो ठीक, अन्यथा उन्हें हजारों रुपये का नुकसान हो जाएगा। उन्होंने बताया कि यात्रा में रोजगार को लेकर उन्होंने दुकानों का संचालन किया था। लेकिन जिस तरह से प्रशासन कार्रवाई कर रहा है, उससे वह बेरोजगार हो गए हैं। इधर, केदारनाथ के पूर्व विधायक मनोज रावत ने भी प्रशासन की इस कार्रवाई को अनुचित बताते हुए प्रभावितों को मुआवजा देने की मांग की है।
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यात्रा में रोजगार के नाम पर रुद्रप्रयाग-गौरीकुंड हाईवे पर सोनप्रयाग से गौरीकुंड तक 190 से अधिक कच्ची दुकानें बनाई गई हैं, जो पूरी तरह से अवैध और अतिक्रण वाली हैं। इन दुकानों के निर्माण को लेकर किसी के पास कोई प्रशासनिक अनुमति नहीं है। इसलिए, इन दुकानों को खाली करने के साथ ही मौके पर ध्वस्त कराया जा रहा है। - जितेंद्र वर्मा, उप जिलाधिकारी ऊखीमठ