Ganesh Chaturthi : गणपति बप्पा... के जयकारों की गूंज, घर-घर पधारे गजानन, यहां करें विघ्नहर्ता के अद्भुत दर्शन
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राजधानी देहरादून में 'मेरे घर में पधारो गजानन जी, मेरे घर में पधारो...गणपति बप्पा मोरिया... जैसे गीतों एवं शुभ योग में घरों एवं पंडालों में गणपति बप्पा विराजमान हो गए। हाथों में लड्डू, सिर पर मुकुट धारण किए हुए लंबोदर नौ सितंबर तक चमकते दमकते पंडालों में विराजेंगे। बप्पा की स्थापना के साथ ही दस दिवसीय महोत्सव की शुरुआत हो गई।
बीते दो साल वैश्विक माहमारी कोरोना के चलते चलते सामूहिक आयोजनों पर प्रतिबंध रहा, गणेश पूजा कार्यक्रम घरों तक ही सीमित रहा। लेकिन इस बार भक्तों ने दोगुने उत्साह के साथ गणेश चतुर्थी पर्व का उत्सव मनाया। मंदिरों व घरों में सुबह से ही गणपति जी की विशेष पूजा-अर्चना की गई। शहर में जगह-जगह गणपति प्रतिमाओं की खरीदारी की गई। कई भक्त गाजे-बाजे के साथ प्रतिमाओं को अपने घर, पंडाल में विराजित करने के लिए ले गए।
ज्योतिषाचार्य आचार्य डॉ. सुशांत राज ने कहा कि भगवान गणेश को प्रथम पूजनीय देव माना जाता है। धार्मिक मान्यताओं के अनुसार गणेश चतुर्थी पर रात्रि में चंद्र देव के दर्शन नहीं करना चाहिए। बताया कि शास्त्रत्तें के अनुसार भगवान गणेश का जन्म भाद्रपद के शुक्ल पक्ष की चतुर्थी को दिन के समय हुआ था। उस दिन बुधवार था। इस साल भी ऐसा ही संयोग बना।
कोटद्वार लैंसडौन में गणेश चतुर्थी के साथ ही बुधवार को 10 दिवसीय श्री गणेश महोत्सव का शुुुुभारंभ हुआ। कोटद्वार और लैंसडौन में विभिन्न आयोजन समितियों की ओर से ढोल नगाड़ों के साथ शोभायात्रा निकाली गई। कोटद्वार में श्री सिद्धि विनायक सेवा समिति आम पड़ाव ने श्री गणेश की विशाल प्रतिमा को शहर भ्रमण कराया। वैदिक मंत्रोचार के बीच श्री गणेश मूर्ति स्थापित की गई।