शुक्रवार तड़के से दोपहर तक हुई मूसलाधार बारिश से क्षेत्र की नदियां उफान पर रहीं। पदमपुर मोटाढांक में मालन नदी की बाढ़ से जहां एक गोशाला बह गई, वहीं दो आवासीय भवनों पर खतरा मंडराने लगा है। कई बीघा जमीन मालन नदी की बाढ़ ने लील ली। बारिश से कई घरों में करंट दौड़ने से लोगों में अफरातफरी मच गई। बाढ़ का पानी घमंडपुर और मवाकोट के कई घरों में घुस गया। तेलीस्रोत में आई बाढ़ से शीतलपुर गांव से लगी सुरक्षा दीवार और खेती की जमीन बह गई। नदी के उफनाने से रामदयालपुर में तेलीस्रोत रपटे पर कई घंटे यातायात बाधित रहा।
उत्तराखंड: मूसलाधार बारिश से बाढ़ जैसे हालात, नदियों ने लिया विकराल रूप, आबादी में घुसा पानी
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पूर्व प्रधान तेजपाल पटवाल ने बताया कि बारिश से कई घरों में करंट दौड़ने लगा, जिससे अफरातफरी मच गई। घमंडपुर में सड़क में जलभराव होने पर उपजिलाधिकारी के निर्देश पर जेसीबी भेजी गई। जैसे ही जेसीबी ने जलभराव को रोकने के लिए चैनलाइज का काम शुरू किया, वैसे ही ग्रामीण भड़क उठे। आरोप है कि ग्रामीणों ने नगर निगम कर्मियों के साथ अभद्रता की। सूचना पर मौके पर पहुंची पुलिस ने किसी तरह लोगों को शांत करवाया और नाली खुलवाकर बरसाती पानी की निकासी की व्यवस्था की। मवाकोट में जगदेव मंदिर के आसपास के कई घरों में बाढ़ का पानी घुस गया। नंदपुर की पूर्व प्रधान और श्रम बोर्ड की सदस्य शशिबाला केष्टवाल के अनुरोध पर उपजिलाधिकारी कमलेश मेहता ने मौका-मुआयना किया। उन्होंने ग्रामीणों को नदी के पानी का बहाव नदी की ओर करने का आश्वासन दिया। उफनते तेलीस्रोत में शीतलपुर गांव से लगी कई मीटर सुरक्षा दीवार बह गई।
वहीं, हरिद्वार में भी गुरुवार की रात को पहाड़ों में हुई मूसलाधार बारिश से गंगा का जलस्तर बढ़ गया। शुक्रवार सुबह गंगा चेतावनी के निशान 293 मीटर को पार करते हुए 293.10 मीटर तक पहुंच गई थी। दोपहर तक जलस्तर 293.25 मीटर तक पहुंच गया था। इसके बाद धीरे-धीरे पानी कम होता गया और शाम को गंगा चेतावनी के निशान 293 मीटर पर बह रही थी। बारिश के बाद रात से ही गंगा का जलस्तर बढ़ने लगा था। जानकारी के अनुसार रात के समय तो गंगा ने चेतावनी के निशान के करीब बहने लगी थी। शुक्रवार की सुबह तक गंगा का जलस्तर 293.10 मीटर और दोपहर 12 बजे तक 293.25 मीटर तक पहुंच गया। लगातार गंगा का जलस्तर बढ़ जाने से जिला प्रशासन अलर्ट हो गया। तटीय इलाकों में बसे लोगों की धड़कने बढ़ने लगी थी। प्रशासन के अधिकारियों ने तटीय इलाकों में बसे ग्रामीणों को गंगा की तरफ नहीं जाने की सलाह दी।
शाम के समय जलस्तर कम होने से अधिकारियों और ग्रामीणों ने राहत की सांस ली। जिला आपदा प्रबंधन अधिकारी मीरा कैंतुरा ने बताया कि पहाड़ों में शुक्रवार को बारिश थमने के बाद गंगा का जलस्तर कम होने लगा था लेकिन गंगा अभी भी चेतावनी के निशान के पास बह रही है। गंगा का जलस्तर बढ़ने से सप्तसरोवर क्षेत्र में आबादी हुई बस्ति में पानी भर गया। बस्ती में पानी भरने से लोगों में अफरा-तफरी मच गई। लोग झोपड़ियों को छोड़कर तटबंध पर पहुंच गए। गंगा का पानी कम होने के बाद बस्ति से पानी उतर गया और लोग अपने झोपड़ियों में लौट आए।