ऋषिकेश में सौंग नदी ने गौहरीमाफी क्षेत्र में जमकर तबाही मचाई। मूसलाधार बारिश से मध्य रात को एकाएक सौंग नदी का स्तर बढ़ने से करीब एक बीघा कृषि भूमि और लगभग चार बीघा वन भूमि सौंग नदी की भेंट चढ़ गई। इस दौरान ग्रामीणें की धान की फसल भी नदी में बह गई। वहीं, दूसरी ओर नदी तट के समीप पर निवासरत दर्जनों परिवार रातभर जागते रहे।
सौंग नदी में आई बाढ़, ऋषिकेश में मची तबाही, तस्वीरें...
खबरें लगातार पढ़ने के लिए अमर उजाला एप डाउनलोड करें
या
वेबसाइट पर पढ़ना जारी रखने के लिए वीडियो विज्ञापन देखें
अगर आपके पास प्रीमियम मेंबरशिप है तो
रविवार की रात को मची इस तबाही से टिहरी फार्म नंबर तीन में एक विद्युत पोल सौंग नदी में जा गिरा। जिसके चलते वहां आसपास करंट दौड़ने लगा। लोगों ने खेतों की ओर भागकर किसी तरह जान बचाई। लगभग आंधे घंटे तक आसपास के क्षेत्र में करंट दौड़ता रहा। परेशान ग्रामीणों ने ऊर्जा निगम के अधिकारियों को फोन लगाया, लेकिन आंधे घंटे बाद ऊर्जा निगम के अधिकारी और कर्मचारी नींद से जागे। तब जाकर कंट्रोल रूम से पूरे गांव की बिजली बंद की गई। राजस्व विभाग के अधिकारियों ने सोमवार को प्रभावित क्षेत्र में पहुंचकर नुकसान का जायजा लिया। प्रभावित काश्तकारों को मुआवजा राशि देने का आश्वासन दिया।
मूसलाधार बारिश से रविवार की देर रात दो बजकर 47 मिनट पर सौंग नदी ने अपना रौद्र रूप दिखाना शुरू किया। नदी के उफान पर आने से ग्रामसभा गौहरीमाफी के टिहरी फार्म नंबर एक और तीन में भारी तबाही मची। सौंग नदी से कुछ दूरी पर रहने वाले ग्रामीणों को उस वक्त जान बचाना भारी पड़ गया। जब उफान में आई सौंग नदी में चालू बिजली का पोल गिर गया। विद्युत पोल गिरने से आसपास के क्षेत्र में करंट दौड़ने लगा।
ग्राम प्रधान सरिता रतूड़ी ने बताया कि रात दो बजकर 47 मिनट पर उन्हें बिरला मंदिर कर्मियों ने फोन पर सौंग नदी का जल स्तर बढ़ने की सूचना दी। इसके बाद उन्होंने रायवाला पुलिस को ग्रामीण क्षेत्र में बाढ़ का पानी घुसने की सूचना दी। रात करीब तीन बजे चालू बिजली का पोल पानी में गिर गया। जिसके बाद आसपाल के क्षेत्र में करंट दौड़ने लगा। करीब दो दर्जन लोगों ने किसी तरह वहां से भागकर जान बचाई। करंट दौड़ने की सूचना देने के लिए ग्राम प्रधान और ग्रामीणों ने बिजली विभाग के दफ्तर से लेकर संबंधित अधिकारियों को फोन किया। लेकिन, परेशान ग्रामीणों के फोन विभागीय अधिकारियों ने नहीं उठाया।
बार-बार फोन करने पर विभागीय कर्मियों ने फोन उठाया। आधे घंटे के बाद पूरे गांव की बिजली को बंद किया गया। ग्रामीण निर्मला देवी, सुनील भट्ट, बालम सिंह, सुरेंद्र सिंह, कमला नंद, निर्मलानंद, खुर्शीराम रतूड़ी ने बताया कि नदी का जल स्तर बढ़ने से उनकी जमीन बह गई है। नदी से सट्टे क्षेत्रों में रहने वाले देवेंद्र सेमवाल, विनोद रावत, रोहित नौटियाल, सूरत सिंह, नवीन चौहान आदि ने कहा कि प्रशासन ग्रामीणों अनदेखी कर रहा है। उन्होंने मुख्यमंत्री से सौंग नदी से गांव की सुरक्षा के लिए पक्का तटबंध बनवाने की मांग की है।