आज (रविवार) को पिता दिवस है। वैसे तो बच्चों की परवरिश करने वाले हर पिता के संघर्ष की अपनी कहानी होती है। पिता खुद की जरूरतों में कटौती कर बच्चों की हर ख्वाहिश पूरी करने की कोशिश करता है। बच्चों का भविष्य संवारने के लिए हर मुश्किल सहता है। 58 वर्षीय राजकुमार प्रजापति की कहानी भी एक आदर्श पिता की है।
Father's Day: कुम्हार ने बेटे के हाथ में चाक की जगह थमाई किताब, संघर्ष की भट्टी में खुद को तपा इस ख्वाहिश को कर रहे पूरा
बेटे किशन को वह पढ़ाकर काबिल इन्सान बनाना चाहते हैं। इसलिए अपने काम से उसे हमेशा दूर रखा है। उसकी पढ़ाई और शौक पूरे करने के लिए कोई कसर नहीं छोड़ी है। कर्ज लेकर तक उसकी जरूरतों को पूरा कर रहे हैं। राजकुमार कहते हैं बिरादरी में उनकी पहचान उसके बेटे से हो, यही सपना है। बिरादरी के लोग कह सकें किशन का पिता राजकुमार है। न कि कुम्हार राजकुमार का बेटा किशन है। राजकुमार अपने घर के आंगन पर चाक चलाकर बर्तन बनाते हैं। आंगन में ही बर्तनों को पकाने की भट्ठी लगी है।
ये भी पढ़ें...Scam in Cooperative Society: किसानों के 17 खातों की जांच में खुला मामला, वसूली सहायक निलंबित
आंगन के बाहर रोड साइड पर उनकी दुकान भी है। दुकान पर मिट्टी के गमलों से लेकर मटका, सुराही और अन्य बर्तन बिकते हैं। कालेज से घर पहुंचने पर किशन दुकान पर बैठकर पढ़ने के साथ बर्तनों को बेचता है। किशन कहता है उसके पिता उसके नायक हैं। उसे पढ़ाने के लिए बहुत कष्ट सहते हैं। राजकुमार प्रजापति की रोजी-रोटी चलाने के लिए भेल मददगार बना है। राजकुमार बताते हैं उनके पिता के वक्त 1968 से भेल के लिए गमलों की सप्लाई देते आ रहे हैं। आज भी भेल की डिमांड पर गमले बनाकर देते हैं। अपनी दुकान से गमला 60 रुपये का बेचते हैं, वहीं गमला बाजार में 80 रुपये का बिकता है।