मौसम में बदलाव के साथ आई फ्लू और आंखों में संक्रमण संबंधित बीमारियों में वृद्धि होने लगी है। चिकित्सकों के अनुसार यह मौसम फ्लू के लिए सबसे ज्यादा अनुकूल होता है। नमी ज्यादा होने के चलते फ्लू के वायरल तेजी से मूवमेंट करते हैं। हर साल इस मौसम में बड़ी संख्या में आई फ्लू समेत अन्य फ्लू के मरीज सामने आते हैं।
जाने-अंजाने आपकी आंखों को हो सकता है ये खतरा, ऐसे रखें ख्याल
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आई फ्लू को सामान्य बोलचाल की भाषा में आंख आना भी कहा जाता है। इस बीमारी में आंखें लाल हो जाती हैं और कीचड़ जमने लगता है। आंखों में मिचमिचाहट और पानी निकलने की समस्या भी होती है। यह बहुत तेजी से एक व्यक्ति से दूसरे व्यक्ति में फैलता है।
नेत्र रोग विशेषज्ञों के अनुसार इस मौसम में वातावरण में नमी ज्यादा होती है। इसके चलते वायरस तेजी से पनपते और फैलते हैं। हाथ मिलाने, संक्रमित जगहों को छूने या मौसम के प्रभाव से हाथों में वायरस आ जाते हैं।
जैसे ही संक्रमित हाथों को आंखों पर लगाया जाता है, वायरस तुरंत आंखों में चला जाता है। इसके बाद आंखों में संक्रमण और एलर्जी की शिकायत होती है। सावधानी ना बरतने और उपचार नहीं करने पर यह नुकसानदायक भी साबित हो सकता है। इससे कार्निया को भी नुकसान पहुंचने की आशंका रहती है।
आई फ्लू के लक्षण: आंखों का लाल होना, आंखों में सूजन, चिपचिप और कीचड़ जमना, जलन और चुभन, आंखों में खुजली, धुंधला दिखाई देना।