कांग्रेस की विस्तारित बैठक में यूं तो कई वक्ता बोले, मगर अपने खास अंदाज से राष्ट्रीय महासचिव हरीश रावत ने सबका ध्यान अपनी ओर खींचा। कभी आक्रामक तो कभी भावुक, एक खांटी राजनीतिज्ञ और कुशल वक्त के भीतर जितने हुनर छिपे होते हैं, उनके दर्शन कराने से रावत मंगलवार को नहीं चूके। कांग्रेस की यात्रा और अपने जुड़ाव का सिलसिलेवार बयान किया। 2017 की हार का जिक्र भी किया और नई जिम्मेदारी पर आभार भी जताया।
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कभी आक्रामक तो कभी भावुक अंदाज में कांग्रेस की महफिल लूटकर ले गए हरीश रावत
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, देहरादून
Updated Wed, 25 Jul 2018 10:44 AM IST
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harish rawat
- फोटो : amar ujala
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उन्होंने कहा-हम चुनाव में हार जरूर गए, लेकिन अगले दस सालों तक शासन का आधार ये हार ही बनेगी। नसीहत भी दी और कहा कि युद्घ में लड़ने वाले सिपाही की पहचान करनी होगी। भावुक अपील की बारी आई, तो कहा-मैं अच्छा हूं या बुरा, लेकिन मुझ से प्यार बनाए रखना। उन्होंने ये भी कहा-जिंदा रहते हुए वह उस परिवार को देश की बागडोर संभालते हुए देखना चाहते हैं, जिसने उन्हें सब कुछ दिया है।
शूरवीर सिंह
पूर्व सीएम हरीश रावत ने कहा-जिस मुकाम पर पहुंचा हूं, उसमें इंदिरा जी, राहुल-सोनिया जी का आशीर्वाद तो है ही, उत्तराखंडवासियों के प्यार की खुशबू भी रही है, जिसे कभी नहीं भूल सकता। उन्होंने कहा-कांग्रेस ने संघर्ष के कई दौर देखे हैं। हर बार उबर कर आई है। उन्होंने आरएसएस-भाजपा और मोदी पर जमकर निशाने साधे। कहा कि 2019 में कांग्रेस के सामने संविधान और लोकतंत्र बचाने की चुनौती है तो 2022 में उत्तराखंड बचाना है। उन्होंने कहा कि जिनसे मुकाबला है, वह बडे़ बेईमान लोग हैं। उन्होंने किसी का नाम लिए बगैर कहा कि 65 सालों में कुछ नहीं हुआ और ये जैसे मां के गर्भ से ही हिंदुस्तान लेकर आए हैं। उन्होंने कहा-ये लोमड़ी, लकड़बग्गे और बघेरे हैं। रावत ने अविश्वास प्रस्ताव पर राहुल की चर्चा, उनकी झप्पी आदि बातों को भी रोचक अंदाज में सामने रखा। अपनी सरकार की उपलब्धियों का भी उन्होंने खुलकर जिक्र किया।
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अपनी सक्रियता को लेकर पार्टी में अपने विरोधियों के स्तर पर आने वाली बातों का उन्होंने रोचक ढंग से जवाब दिया। उन्होंने कहा कि एक सिपाही के तौर पर उनकी भूमिका उत्तराखंड में भी होगी। बूढ़ा आदमी हूं। बर्तन कभी खड़खड़ा जाए तो घबराने की जरूरत नहीं है। पूर्व सीएम ने पार्टी प्रभारी अनुग्रह नारायण सिंह को नाड़ी वैद्य करार दिया। उन्होंने कहा कि कई तरह के वैद्य होते हैं, लेकिन जितना उन्होंने प्रभारी को समझा और जाना है, उसमें वह उन्हें नाड़ी वैद्य ही मानते हैं, जो हमारी नब्ज देखकर उचित इलाज कर देंगे।
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राष्ट्रीय महासचिव ने कहा कि हमारा मुकाबला यहां वालों (उत्तराखंड सरकार) से नहीं है। मुकाबला दिल्ली वालों से हैं। यहां वालों के लिए तो यदि प्रीतम सिंह ही फूंक मार देंगे, तो डबल इंजन और ज्यादा डगमगा जाएगा। हरीश रावत ने कांग्रेस छोड़कर भाजपा में जाने वाले नेताओं पर भी चुटकी ली। उन्होंने कहा कि हम तो अपनी उपलब्धियों का ब्योरा 2002 से देना चाहते थे। रजिस्टर वहीं से खोलना चाहते थे, लेकिन कुछ लोग अपना रजिस्टर लेकर ही चले गए तो क्या किया जा सकता है।