इस बार दीपावली सूर्य के दिन रविवार, पद्मांक्ष योग और विशिष्ट चित्रा नक्षत्र में पड़ रही हैं। दीपावली पूजन के लिए तीन शुभ मुहूर्त में पूजा करना शुभ होगा। इस बार दीपावली पर रविवार को विशेष पूजन काल करीब 1 घंटा 32 मिनट का होगा।
शाम 6.40 बजे से रात्रि 8.30 बजे तक समस्त गृहस्थों के लिए सर्वाधसिद्धि योग है। इस समय लक्ष्मी का पूजन किया जाए तो सभी प्रकार के सुखदायी फल प्राप्त होंगे। इस समय को ज्योतिष में प्रदोषकाल कहा गया है। इस समय प्रदोषकाल में वृष लग्र, स्थिर लग्र, चित्रा नक्षत्र, तुला राशि के चंद्र एवं अमृत की चौघड़ियां मिल जाएंगी। यह सभी शुभ मुहूर्त बनाते हैं।
दूसरा योग रात 8.15 बजे से रात 11 बजे तक रहेगा। इस काल को निशिथ काल का योग कहा गया है। इस काल में श्रीसूक्त का पाठ करना चाहिए। कनकधारा स्तोत्र का पाठ, लक्ष्मी सहस्त्रनाम का पाठ करते हुए महालक्ष्मी की चांदी की मूर्ति पर अभिषेक करना सर्वोत्तम है।
तीसरा और विशेष योग महानिशिथ काल का है। इस योग की पूजा रात्रि 10.50 से लेकर आधी रात के बाद 1.28 बजे तक की जाएगी। पूजा का यह काल खास तौर से तंत्रसाधकों के लिए है। अघोर सम्प्रदाय के लोग भी इसी काल का प्रयोग अपनी सिद्धियों के लिए करते है।
मार्तण्ड रत्न एवं ज्योतिष अनुसंधान केंद्र के डॉ. पं. सुनील पैन्यूली ने बताया कि दिवाली के दिन पूजा स्थल पर तिल के तेल का चौमुखा दीपक जलाना चाहिए। लाल वस्त्र में पांच गोमती चक्र, 11 कौड़ियां, पांच हल्दी की गांठ, पांच कमल गट्टे और एक चांदी का सिक्का या साधारण सिक्का रखकर उनका पूजन करें। इसके बाद ऊं ह्रीं श्रीं: नम: मंत्र की पांच से सात माला का जाप करें।