भारतीय सेना को सुपुर्द की गई धनुष तोप के कई उपकरण देहरादून की आयुध निर्माणी में तैयार किए गए हैं। इस तोप को देसी बोफोर्स के नाम से भी जाना जा रहा है। मंगलवार को दून पहुंचे आयुध निर्माणी बोर्ड के सदस्य चंद्र शेखर विश्वकर्मा ने यह जानकारी दी।
यहां तैयार हुए बोफोर्स से भी शक्तिशाली 'धनुष' के कई उपकरण, जानिए इसके बारे में खास बातें
उन्होंने बताया कि यह देश के लिए गौरव की बात है कि धनुष तोप के निर्माण में आयुध निर्माणी देहरादून ने भी अहम किरदार निभाया है। बता दें, एक तरफ गन कैरित फैक्ट्री जबलपुर भारतीय सेना को धनुष तोप सौंपी है। वहीं दूसरी ओर आयुध निर्माणी देहरादून अपना प्लेटिनम जुबली समारोह मना रही है।
चंद्र शेखर विश्वकर्मा ने बताया कि ‘धनुष’ के निर्माण में आयुध निर्माणी देहरादून की भी महत्वपूर्ण भूमिका है। तोप के पूरे साइटिंग सिस्टम दून में ही तैयार किए गए हैं और इस उच्च गुणवत्ता की तोप के निर्माण में जो भी ऑप्टिकल यूनिट लगी है, वह देहरादून में ही बनाई गई है।
तीन साल से हो रहा है ‘धनुष’ का ट्रायल
-बॉर्डर एरिया और अलग-अलग हालात, मौसम में फायरिंग के दौरान तोप से दो हजार से ज्यादा गोले दागे गए।
-सियाचिन जैसे ठंडे इलाकों के बाद राजस्थान के गर्म मरुस्थली इलाकों में ‘धनुष’ का दो-दो बार कामयाब ट्रायल किया जा चुका है।
-हाल ही में बालासोर और पोकरण में भी बॉर्डर एरिया में भी ‘धनुष’ ने शानदार प्रदर्शन किया।
-सेना के आर्टिलरी डिवीजन ने रेग्युलर यूज के लिए छह तोपें जीसीएफ से मांगी थीं। इनमें से तीन तोप और सौंप दी गई हैं।
ऑटोमेटिक है ‘धनुष’
-45 कैलीबर की 155 मिलीमीटर और ऑटोमेटिक धनुष बोफोर्स तोप की तकनीकी पर काम करती है।
-‘धनुष’ की सबसे बड़ी खासियत है यह ऑटोमेटिक सिस्टम से खुद ही गोला लोड कर फायर कर देती है।
-लगातार कई घंटों के फायरिंग के बाद भी इसका बैरल गर्म नहीं होता।
-तोप का बैरल कानपुर जीसीएफ में तैयार किया गया है।