दिल्ली की एक संकरी गली में हुए अग्निकांड ने कई लोगों को मौत की नींद सुला दिया। देहरादून में भी कई गलियां और बाजार ऐसे हैं, जहां के लिए हर वक्त बस यही दुआ होती है कि भगवान न करे कि कभी यहां कोई चिंगारी भड़के।
यदि ऐसा हुआ तो छोटी सी आग भी बड़े भयावह अग्निकांड में तब्दील हो सकती है। रविवार को अमर उजाला की टीम ने कुछ ऐसे ही इलाकों का दौरा किया और उन्हें अग्निशमन विभाग के संसाधनों की कसौटी पर परखा। इससे सामने आया कि वर्तमान में अग्निशमन विभाग के सिटी सेंटर (जिला मुख्यालय) पर संसाधन मौजूद हैं वे किसी भी संकरे स्थान पर आग से लड़ने में नाकाफी हैं।
दरअसल, विभाग के पास दो छोटे फायर टेंडर (टाटा 207) हैं, जिसकी क्षमता 2500 लीटर पानी की है। यही एक गाड़ी है जो इन गलियों में प्रवेश कर सकती है। विभागीय अधिकारियों के मुताबिक यह भी काफी पुरानी हो चुकी है। इसके अलावा तीन मोटरसाइकिलों पर बने टेंडर भी हैं, जिनसे छोटी गलियों में आग से लड़ा जा सकता है। मगर, मौजूदा समय में इन्हें भी मेंटेनेंस की दरकार है। इसके अलावा कुछ बड़े फायर टेंडर भी ऐसे हैं जो अपना जीवन चक्र पूरा कर चुके हैं और अब जैसे ओवरटाइम करने में लगे हैं।
कौन कौन से हैं ये इलाके :
मालियान गली- शहर की बेहद संकरी गलियों में से एक। यहां एक बार पहले भी अग्निकांड हो चुका है जहां अग्निशमन विभाग की सांसे अटक गई थी।
मन्नू गंज- लगभग पांच से छह हजार की आबादी वाला यह इलाका शहर के सबसे भीड़भाड़ वाले इलाकों में गिना जाता है। यहां बड़ी गाड़ियां तो छोड़ो छोटी को भी बेहद मशक्कत करनी पड़ेगी।
झंडा बाजार इलाका- यह बाजार शहर के सबसे संकरे बाजारों में से एक है। यहां भगवान न करे कि कोई अग्निकांड हो यदि होता है तो बड़ा हादसा होने में देर नहीं लगेगी।
सिर्फ एक नई गाड़ी मिली जिले को
इस साल राज्य में छह वाटर टेंडर खरीदे गए हैं। इनमें से एक हरिद्वार को और एक ऊधमसिंह नगर को मिला है। जबकि, एक अभी देहरादून को मिलना है। यह वाटर टेंडर छह-छह हजार लीटर वाले हैं। इनसे बड़े इलाकों में अग्निशमन का काम किया जा सकता है लेकिन छोटे इलाकों में ले जाने में पसीने छूट जाएंगे। इसमें कार्बनडाइऑक्साइड वाले उपकरण भी लगे हैं।