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पतंजलि में हो रहा ऐसा क्लीनिकल ट्रायल जो आज तक दुनिया में कहीं नहीं हुआ

Thu, 14 Mar 2019 12:01 PM IST
Nirmala Suyal Nirmala Suyal कौशल सिखौला, अमर उजाला, हरिद्वार
कौशल सिखौला, अमर उजाला, हरिद्वार Published by: Nirmala Suyal Nirmala Suyal Updated Thu, 14 Mar 2019 12:01 PM IST
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Clinical trials of Ayurvedic medicines first time in world at patanjali
अमर उजाला फाइल फोटो

दुनिया में आज तक कहीं भी आयुर्वेदिक दवाओं के क्लीनिकल ट्रायल मरीजों पर नहीं हुए हैं। आयुर्वेद ग्रंथों में मौजूद संकेतों के हिसाब से रोगियों को दवा दी जाती है। केवल एलोपैथी के क्षेत्र में क्लीनिकल ट्रायल होते आए हैं। पंतजलि विश्व का ऐसा पहला संस्थान बन गया है, जहां ट्रायल चूहों, खरगोश, कुत्तों आदि पर आयुर्वेदिक दवाओं के प्रयोग हो रहे हैं। सारे प्रयोग सफल हो जाने के बाद इनका उपयोग पतंजलि के दो अस्पतालों में किया जाता रहा है।

Clinical trials of Ayurvedic medicines first time in world at patanjali
पतंजलि

पंतजलि योगपीठ की विश्वस्तरीय चार प्रयोगशालाओं में देशभर से जुटे 500 वैज्ञानिक इस काम में लगे हैं। क्लीनिकल ट्रायल विश्व स्वास्थ्य संगठन की ओर से भेजी गई गाइड लाइन के हिसाब से किया जा रहा है। योगपीठ के महामंत्री आचार्य बालकृष्ण ने बताया कि विश्व में पतंजलि ऐसी संस्था बन गई है, जिसे इन ट्रायल के लिए भारत सरकार से एनएबीएल प्रमाणपत्र प्राप्त हुआ है। यह प्रमाणपत्र अब तक केवल एलोपैथिक अनुसंधानशालाओं को दिया जाता था। शास्त्रों में वर्णित दवाएं रोगी पर कैसे काम करती हैं, इसका पूरा ब्योरा रखा जा रहा है। साथ ही दो, तीन और चार जड़ी बूटियों को मिलाकर नए योग, मिश्रित औषधि और भस्म तैयार की जा रही है। चिकित्सा की भाषा में इस कार्य को रिवर्स फार्मा कहा जाता है। 

Clinical trials of Ayurvedic medicines first time in world at patanjali

आचार्य ने बताया कि इन दवाओं के प्रयोग गंभीर रोगों से ग्रसित पशुओं पर किए गए और लगभग शत प्रतिशत सफलता प्राप्त की गई। पतंजलि अनुसंधानशाला बायोसेल्फ लेबल थ्री स्तर की है। आचार्य बालकृष्ण ने बताया कि इन आयुर्वेदिक कम्पाउंड्स के प्रयोग दुनिया भर से एकत्रित मुनष्यों की कोशिकाओं पर भी किए जा रहे हैं। ये कोशिकाएं दुनिया के विभिन्न महाद्वीपों से प्राप्त की गई हैं। इनमें यूरोपियन, अमेरिकन, अफ्रीकन और अरेबियन कोशिकाएं शामिल हैं। सभी कोशिकाएं प्रयोगों के बाद रोग मुक्त पाई गई हैं।

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आचार्य बालकृष्ण ने बताया कि पतंजलि की अनुसंधानशालाओं में दुनिया के 72 हजार पौधों पर अनुसंधान का कार्य चल रहा है। साथ ही विश्वभर में उपलब्ध वन जड़ी बूटियों पर वर्ल्ड हर्बल एनसाइक्लोपीडिया तैयार करने का काम तीन वर्षों से लगातार किया जा रहा है। दुनिया में जहां भी जो औषधीय पौधा उपलब्ध है, उसे पतंजलि के अनुसंधानशाला में लाकर शोध कार्य जारी है।

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Clinical trials of Ayurvedic medicines first time in world at patanjali
- फोटो : अमर उजाला

प्राचीन ग्रंथों में वर्णित औषधियों को शोधित, परिष्कृत एवं परिवर्धित करने का काम जीवन रक्षक दवाएं तैयार करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभा रहा है। उन्होंने विश्वास जताया कि शीघ्र ही आयुर्वेदिक औषधियां उन रोगों के इलाज में कारगर साबित होंगी, जिन रोगों को एलोपैथी असाध्य बताकर छोड़ देती है। उन्होंने कहा कि विश्व स्वास्थ्य संगठन ने पतंजलि द्वारा भेजी गई क्लीनिकल ट्रायल की सभी रिपोर्ट स्वीकार करते हुए उन्हें असाध्य रोगों के निदान में उपयोगी बताया है।

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