ईसाइयों का सबसे बड़े त्योहार क्रिसमस पर प्रभु यीशु के जन्मदिवस देशभर में धूमधाम से सोमवार को मनाया जाएगा। लेकिन क्या आपको पता है कि सेंटा इस दिन लाल कपड़े ही क्यों पहनता है।
क्रिसमस क्राइस्ट्स और मास दो शब्दों को मिलकार बना है। इसमें क्रिस का मतलब जीसस क्राइस्ट और मस का मतलब प्रार्थना करता हुआ ग्रुप है।
ईसाई संत निकोलस किसी गरीब को पैसे की कमी के कारण क्रिसमस मनाने से वंचित नहीं देख सकते थे। इसलिए वह लाल कपड़े पहनकर, चेहरे को दाढ़ी से ढक गरीबों को खाने की चीजें और गिफ्ट बांटते थे। तभी से सेंटा क्लाज का यह रूप सामने आया।
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लाल रंग जीसस क्राइस्ट के रक्त का प्रतीक है। जीजस हर ईसाई को अपनी संतान समझते थे और उन्हें बिना शर्त प्यार करते थे। लाल रंग के जरिये वह सबको मानवता का पाठ पढ़ाना चाहते थे। उनका कहना था कि लाल खुशी का रंग है।
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क्रिसमस ट्री को सजाने की शुरुआत जर्मनी से हुई थी। माना जाता है कि मार्टिन लूथर नामक शख्स की निगाह बर्फ से ढके फर के पेड़ों पर पड़ी, जो बेहद खूबसूरत लग रहे थे। वह कुछ पौधे घर लाए और उन्हें कैंडल्स से सजाया। ट्री में घंटियां बुरी आत्माओं को दूर रखने और अच्छाइयों को लाने के लिए परी और फेयरी की मूर्तियों लगाई जाती हैं।