कांचहि बांस के बहंगियां, बहंगी लचकत जाए। दीहीं ना ससुर जी पियरिया, बहंगी घाटे पहुंचाय। 36 घंटे निर्जला व्रत रख कुछ इसी तरह के धार्मिक गीतों के साथ व्रति महिलाओं ने अस्त होते सूर्य को अर्घ्य दिया और सुख समृद्धि की कामना की। गुरुवार की सुबह व्रती उगते सूरज को अर्घ्य देकर ही जल और अन्न ग्रहण करेंगे।
छठ पूजा 2021: आज गंगाघाटों पर अस्तांचल गामी सूर्य को व्रतियों ने दिया अर्घ्य, मुख्यमंत्री ने दी बधाई
देहरादून में सेलाकुई, रायपुर, मालदेवता, नत्थनपुर, छह नंबर पुलिया, हरबंशवाला सहित 15 घाटों पर छठ पर्व मनाने की व्यवस्था है। वहीं हरिद्वार में गंगा के दक्ष प्रजापति घाट, चौधरी चरण सिंह घाट, मुनि घाट, रविदास घाट, शहीद भगत सिंह घाट, श्रीहंस पावन घाट, अग्रसैन घाट प्रेमनगर, गोविंद घाट, सतनाम साक्षी घाट, श्रीकृष्ण घाट, विश्वकर्मा घाट, श्रीरामघाट, महर्षि कश्यप घाट, स्वामी विवेकानंद घाट, लवकुश घाट, अमरापुर घाट पर शाम को अस्तांचलगामी को सूर्य को अर्घ्य देने के लिए व्रतियों की भीड़ उमड़ी। इसके लिए गंगाघाटों पर छठ पर्व समितियों के द्वारा रोशनी का इंतजाम भी किया गया है।
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छठ पूजा के लिए घाटों पर लगी भीड़
- फोटो : अमर उजाला
इसके साथ ही सूर्य उपासना के पर्व पर हरकी पैड़ी और अन्य गंगा घाटों पर श्रद्धालुओं का ऐसा हुजूम उमड़ा कि नजारा देखने लायक था। महिलाओं ने पानी में खड़े रहकर पूजा अर्चना की और सूर्य को अर्घ्य देकर अपने घर परिवार की मंगल कामना की। इसके बाद व्रत वाले घरों में रातभर जागरण कर मंगल गीत गाए गए।
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छठ पूजा के लिए घाटों पर लगी भीड़
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गुरुवार को उगते हुए सूर्य को अर्घ्य देकर व्रत का पारण किया जाएगा। छठ पर्व को लेकर बिहार और पूर्वांचल के लोगों में दो दिन पहले से उत्साह बना था। पर्व के तीसरे दिन महिला श्रद्धालुओं ने सुबह के समय पूजा अर्चना की। इसके बाद व्रती महिलाएं अपने परिवार के लोगों के साथ शाम के समय गंगा घाट पर सूर्य को अर्घ्य देने की तैयारी में जुट गए।
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छठ पूजा के लिए घाटों पर लगी भीड़
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शाम के समय महिलाएं परिवार के लोगों के साथ गाजे बाजे के साथ घाटों की सीढ़ियों पर बनाई गईं वेदियों पर प्रसाद का दउरा और पूजा की सामग्री से भरे सूप रखकर व्रती महिलाओं ने भगवान भास्कर का आह्वान किया।
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छठ पूजा के लिए घाटों पर लगी भीड़
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अस्त होते सूर्यदेव को अर्घ्य देकर लोक कल्याण की कामना की। शाम को कुशी की पूजा की गई। इसके बाद घाटों से घरों के लिए रवाना हुईं। ये व्रती महिलाएं रातभर निराहार रहती हुई फिर तड़के नहा धोकर घाटों पर पहुंचेंगी और उगते सूर्य को अर्घ्य देंगी।