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छठ पूजा 2018: एक साथ बन रहे कई संयोग, ऐसे पूजा करने से व्रतियों की मनोकामनाएं होंगी पूरी 

Mon, 12 Nov 2018 08:34 AM IST
न्यूज डेस्क/अमर उजाला, देहरादून
न्यूज डेस्क/अमर उजाला, देहरादून Updated Mon, 12 Nov 2018 08:34 AM IST
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Chhath puja 2018 Many Rare Coincidence Do for luck and fortune
छठ पूजा देहरादून - फोटो : राजीव गुप्ता

छठ पूजा का त्योहार भले ही कार्तिक शुक्ल षष्ठी को मनाया जाता है, लेकिन इसकी शुरुआत कार्तिक शुक्ल चतुर्थी को नहाय खाय के साथ होती है। मान्यता है कि इस दिन व्रती स्नान कर नए वस्त्र धारण करते हैं और शाकाहारी भोजन लेते हैं। व्रती के भोजन करने के बाद घर के अन्य सदस्य भोजन करते हैं। ज्योतिषाचार्य गौरव आर्य ने बताया कि रविवार यानि आज (11 नवंबर) नहाय खाय पर सिद्धि योग का संयोग बन रहा है। 

Chhath puja 2018 Many Rare Coincidence Do for luck and fortune
chhath in dehradun - फोटो : amar ujala

साथ ही अर्घ्य वाले दिन यानी 13 नवंबर को अमृत योग व स्वार्थ सिद्धि योग का संयोग बन रहा है। जबकि छठ के अंतिम दिन 14 नवंबर सुबह छत्र योग का संयोग बन रहा है। हिंदू धर्म में सूर्य को जल देने का बहुत महत्व है और छठ पूजा के पावन पर्व पर ढलते और उगते सूर्य को अर्घ्य देने से कई पापों का नाश होता है। छठ का दूसरा दिन खरना कार्तिक शुक्ल पंचमी को पूरे दिन व्रत रखा जाता है और शाम को व्रती भोजन ग्रहण करते हैं। इसे खरना कहा जाता है। 

Chhath puja 2018 Many Rare Coincidence Do for luck and fortune
छठ पूजा देहरादून - फोटो : राजीव गुप्ता

इस दिन अन्न और जल ग्रहण किए बिना उपवास किया जाता है। शाम को चाव व गुड़ से खीर बनाकर खाया जाता है। षष्ठी के दिन छठ पूजा का प्रसाद बनाया जाता है। इसमें ठेकुआ विशेष होता है। कुछ स्थानों पर इसे टिकरी भी कहा जाता है। चावल के लड्डू भी बनाए जाते हैं। प्रसाद व फल लेकर बांस की टोकरी में इसे सजाया जाता है। टोकरी की पूजा कर सभी व्रती सूर्य को अर्घ्य देने के लिए तालाब, नदी या घाट आदि पर जाते हैं। 

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chhath in dehradun - फोटो : amar ujala

स्नान कर डूबते सूर्य की आराधना की जाती है। मान्यताओं के मुताबिक छठ पर्व के दौरान पीतल और तांबे से बने पात्र से अर्घ्य देना चाहिए। तांबे के पात्र में दूध डालकर अर्घ्य नहीं देना चाहिए। वेदाचार्यां के मुताबिक छठ खासकर शरीर, मन और आत्मा की शुद्धि का पर्व है। नहाय खाय से सप्तमी के पारण तक उन भक्तों पर षष्ठी माता की कृपा बरसती है जो श्रद्धापूर्वक व्रत करते हैं। 

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छठ पूजा देहरादून - फोटो : राजीव गुप्ता

वैसे तो यह पर्व साल में चैत्र शुक्ल षष्ठी और कार्तिक शुक्ल षष्ठी दो तिथियों में मनाया जाता है, लेकिन कार्तिक शुक्ल षष्ठी को मनाए जाने वाले पर्व को मुख्य माना जाता है। चार दिन तक चलने वाले इस पर्व को छठ पूजा, डाला छठ, छठी माई, छठ माई पूजा और सूर्य षष्ठी पूजा नाम से जाना जाता है।

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