केंद्रीय फिल्म प्रमाणन बोर्ड (सीबीएफसी) के अध्यक्ष एवं प्रसिद्ध गीतकार प्रसून जोशी का कहना है कि जरूरी नहीं कि हर बार किसी फिल्म को लेकर उपजा विवाद सही और सच ही हो। कई बार फिल्म को सुर्खियों में लाने और मार्केटिंग के लिए विवादों में डाला जाता है।
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कुमाउं विवि के दीक्षांत समारोह में प्रसून जोशी
बुधवार को कुमाऊं विश्वविद्यालय के 15वें दीक्षांत समारोह में हिस्सा लेने नैनीताल पहुंचे प्रसून जोशी ने कहा कि अब वक्त आ गया है कि जनता भी समझे कि किस फिल्म को लेकर वाकई विवाद है और किस विवाद को सिर्फ पब्लिसिटी के लिए जन्म दिया गया है। कई बार एक साथ भारी संख्या में फिल्में सेंसर बोर्ड के पास आ जाती हैं। वह प्रयास करते हैं कि तीन-चार सप्ताह में हर हाल में फिल्म को पास या फेल कर दिया जाए।
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कुमाउं विवि के दीक्षांत समारोह में प्रसून जोशी
उन्होंने कहा कि गोविंद निहलानी की फिल्म को सेंसर बोर्ड ए प्रमाण पत्र के साथ पास करने पर सहमत था लेकिन वह इस पर तैयार नहीं हुए। इस फिल्म में हीरो महिलाओं के साथ दुर्व्यवहार को मजे की बात कहते हुए दिख रहा है। फिल्म में कई जगह महिलाओं को उपभोग की वस्तु की तरह दर्शाया गया है। ऐसे में फिल्म को पास नहीं किया गया तो गोविंद निहलानी कोर्ट चले गए।
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कुमाउं विवि के दीक्षांत समारोह में प्रसून जोशी
उन्होंने कहा कि मेरठ, दिल्ली और मुंबई में रहने के दौरान भी वह उत्तराखंड और कुमाऊं से जुड़े रहे। उन्होंने कई गानों में कुमाऊंनी शब्दों का प्रयोग किया। ‘तारे जमीं पर’ फिल्म में एक गाने में उन्होंने झम शब्द का प्रयोग किया है। मुंबई में आज भी तमाम लोग उस शब्द को छम गाते हैं। जब वह अल्मोड़ा में थे तो उनके घर में हिंदी गाने सुने भी नहीं जाते थे। इसके बाद भी उन्होंने हिंदी गाने लिखे, जो लगातार प्रसिद्ध होते चले गए।
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कुमाउं विवि के दीक्षांत समारोह में प्रसून जोशी
प्रसून जोशी ने कहा कि उत्तराखंड के तमाम युवा सफलता के लिए संघर्ष कर रहे हैं। युवाओं को जोश के साथ-साथ धैर्य रखने की भी जरूरत है। उन्हें भी यह कामयाबी एक दिन में नहीं मिली है बल्कि उन्होंने भी लंबे समय की कड़ी मेहनत से ख्याति अर्जित की है। सफलता के मायने बताते हुए उन्होंने कहा कि सिर्फ पैसा कमाना और ख्याति अर्जित करना ही सफलता नहीं है। परिवार को सफलतापूर्वक संभालने वाला भी कामयाब व्यक्ति माना जाता है।