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लॉकर में रखनी पड़ी इस शख्स की अस्थियां, बेटा-बेटी भी लेने नहीं पहुंचे, वजह जान भावुक हो जाएंगे

Mon, 11 Jun 2018 09:09 AM IST
आरडी खान, अमर उजाला, काशीपुर
आरडी खान, अमर उजाला, काशीपुर Updated Mon, 11 Jun 2018 09:09 AM IST
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Bons put into locker emotional reason behind funeral
anshuman file photo

कहते हैं कि इतिहास खुद को दोहराता है, ऐसा ही कुछ हुआ है अंशुमान के साथ। अंत्येष्टि में मौजूद रहने के बावजूद अंशुमान ने अपने माता-पिता की चिताओं से अस्थियां नहीं चुनीं। अब उसकी अस्थियां चुनने के लिए भी परिवार का कोई सदस्य (बेटा रुद्रप्रताप और बेटी आर्या) नहीं पहुंचा।

Bons put into locker emotional reason behind funeral
anshuman

बता दें कि ग्राम हरियावाला में अतुल यादव के मकान में किराए पर रहने वाले कानपुर निवासी अंशुमान ने पत्नी सरिता सिंह, दो बेटियों दिव्यांशी और हिमांशी को सल्फास दे दिया था। बाद में उसने खुद भी सल्फास खा कर जान दे दी थी। उसका छोटा बेटा रुद्रप्रताप और एक बेटी आर्या जहर न खाने के कारण बच गए। अंशुमान का साला रवि सिंह और साढ़ू मोनू सिंह चारों की अंत्येष्टि के बाद दोनों बच्चों को लेकर चले गए थे।
 

Bons put into locker emotional reason behind funeral
cremation - फोटो : amar ujala

फोन पर पूछने पर रवि ने बताया कि उनके परिवार में अस्थियां चुनने की परंपरा नहीं है। अस्थि से फूल अंशुमान के खानदानी ही चुन सकते हैं। दो दिन तक किसी के नहीं पहुंचने पर ग्राम प्रधान राजकुमार ने ग्रामीणों को साथ लेकर चिताओं से अस्थियां चुनीं और श्मशान घाट में बने कमरे के लॉकर में रखवा दीं। सीडब्ल्यूसी की चेयरमैन डॉ. रजनीश बत्रा और ग्राम प्रधान राजकुमार ने अस्थि विसर्जन के लिए अंशुमान की चाची रायबरेली निवासी लालगंज स्थित निजी कॉलेज में शिक्षक कनकलता उर्फ जया से संपर्क साधा।

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rudra

डॉ. बत्रा के बहुत समझाने पर वह अस्थि विसर्जन के लिए काशीपुर आने को तैयार हुईं। शनिवार को वह अंशुमान के मौसेरे भाई उन्नाव निवासी देवेंद्र सिंह के साथ काशीपुर पहुंचीं। यहां समिति के सचिव विकास शर्मा खुट्टू ने लॉकर से अस्थियों की पोटली निकालकर उन्हें सौंपी। इस दौरान कनकलता फफक पड़ीं। बाल कल्याण समिति की चेयरमैन डॉ. रजनीश बत्रा व ग्राम प्रधान राजकुमार ने उसका ढांढस बंधाया।  बाद में कनकलता ने बताया कि वर्ष 2009 में अंशुमान के पिता योगेंद्र प्रताप की मृत्यु हुई।

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rudra

उस समय उनके पति गजेंद्र को लकवा हो चुका था। अंशुमान ने अपने पिता की चिता को मुखाग्नि देने से इनकार कर दिया। तब उनके लकवाग्रस्त पति महेंद्र ने अपने दिवंगत भाई की चिता को मुखाग्नि दी। उनके पति ने ही चिता के फूल चुने और अंतिम क्रिया की सारी रस्में कीं। उसकी मां शिवा सिंह की मृत्यु उसके पीहर में हुई। मां के अंतिम संस्कार में भी अंशुमान ने शिरकत नहीं की थी। कनकलता ने बताया कि वह और उनके पति गजेंद्र अंशुमान की मझली बेटी हिमांशी को गोद लेना चाहते थे। इस बारे में कई बार अंशुमान से बात भी की, लेकिन उसने हर बार मना कर दिया। बाद में अंशुमान की चाची और मौसेरा भाई अस्थि विसर्जन के लिए हरिद्वार रवाना हो गए। 

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