‘बदरी द क्लाउड’ में जहां टिहरी विस्थापितों के दर्द और पलायन को दिखाया गया है, वहीं उत्तराखंड की खूबसूरत वादियों को भी दुनिया के सामने रखा
गया है।
फिल्म निर्माता संजय सिंह के निर्देशन में करीब सवा करोड़ की लागत से बनी इस डेढ़ घंटे की फिल्म में उत्तराखंड के पर्यटक स्थलों के साथ-साथ लोक संस्कृति को भी उजागर करने का प्रयास किया गया है।
मंगलवार को राजपुर रोड स्थित एक मल्टीप्लेक्स में फिल्म ‘बदरी द क्लाउड’ का प्रीमियर शो हुआ। शो का शुभारंभ कैबिनेट मंत्री हरक सिंह रावत ने किया। फिल्म की कहानी के मुताबिक प्रदेश में विभिन्न क्षेत्र में संभावनाएं तलाशने के उद्देश्य से पर्यटन सचिव उमाकांत एक टीम को पहाड़ भेजते हैं।
जिसे तत्कालीन मुख्यमंत्री हरीश रावत फ्लैग ऑफ करते हैं। टीम संभावनाओं की तलाश में हर्षिल पहुंचती हैं। हर्षिल की खूबसूरत वादियों को फिल्म में दिखाया गया है। इसके बाद टीम टिहरी जाती है।
टिहरी की आबोहवा को ‘ठंडो रे ठंडो तेरी पहाड़ों ...’ लोकगीत के जरिये फिल्म में दिखाया गया है। फिल्म में टिहरी बांध बनने से बेघर लोगों के दर्द और
घंटाघर के डूबने के दृश्य को भी दिखाया गया है। फिल्म में चोपता और औली की वादियों को भी दुनिया के सामने रखा गया है।