सरकारी कर्मचारियों के लिए सरकार ने एक फरमान जारी किया है, जिसे पढ़कर आपकी टेंशन बढ़ जाएगी।
सातवें वेतन आयोग की संस्तुतियों के तहत निर्धारित भत्तों का इंतजार कर रहे प्रदेश सरकार के लाखों कर्मचारियों की मुराद जल्द पूरी नहीं हो पाएगी। उनके भत्तों पर फिलहाल सरकार की खराब माली हालत का ब्रेक है।सरकार की हिचकिचाहट की मुख्य वजह राजस्व खर्च में बढ़ोतरी है।
वित्त विभाग के आंकलन के अनुसार, सरकार यदि सभी कार्मिकों को नए भत्ते देने का निर्णय लेगी तो इससे राजकोष पर करीब 1800 करोड़ रुपये सालाना अतिरिक्त वित्तीय बोझ बढ़ेगा। यानी सरकार को हर महीने भत्तों पर 150 करोड़ रुपये ज्यादा खर्च करने होंगे।
सूत्रों की मानें तो वर्तमान में प्रदेश सरकार सभी कर्मचारियों पर वेतन, भत्तों व पेंशन पर करीब 1200 करोड़ रुपये सालाना खर्च कर रही है। यही वजह है कि सरकार भत्ते देने से हिचक रही है। वरना वेतन समिति भत्तों के निर्धारण के संबंध में अपनी रिपोर्ट काफी पहले सौंप चुकी है। कैबिनेट ने इस रिपोर्ट का अध्ययन करने के लिए मुख्य सचिव की अध्यक्षता में एक कमेटी बनाई है, जिसने अभी अपनी रिपोर्ट कैबिनेट को प्रस्तुत नहीं की है।
सरकार ने सातवां वेतन लागू किया, जिससे राजकोष पर 4100 करोड़ रुपये का व्यय भार पड़ा। 130 करोड़ रुपये बोनस पर खर्च किए। एरियर भी करोड़ों की धनराशि व्यय की गई। सरकार की माली हालत के आधार पर भत्तों को देने का निर्णय किया जाएगा। अभी मुख्य सचिव की अध्यक्षता वाली समिति की रिपोर्ट भी आनी है। उस पर सम्यक विचारोपरांत सरकार निर्णय लेगी।
- प्रकाश पंत, वित्त मंत्री