उत्तरकाशी के हर्षिल क्षेत्र का सेब अब विदेशियों को भी खूब भाने लगा है। देवभूमि के इस सेब की मिठास अमेरिका को पसंद आ रही है। यही कारण है कि अब इसकी बेहतर ब्रांडिंग की तैयारी के लिए उत्तराखंड मंडी निदेशालय ने भी तैयारी शुरू कर दी है।
अमेरिका को भाया उत्तराखंड का ये खास 'फल', बढ़ी डिमांड
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मंडी निदेशालय हर्षिल के झाला क्षेत्र में साढ़े सात करोड़ रुपये की लागत से सीए सिस्टम (कंट्रोल एडमोस्टफेयर) लगाने जा रहा है। इसके लिए बाकायदा झाला में जमीन का भी चयन कर लिया गया है। इसमें खास बात यह रहेगी कि इस सीए सिस्टम मशीन से सेब सड़ेगा नहीं और यह करीब छह महीने तक खराब नहीं होगा।
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हर साल उत्तरकाशी का सेब व्यवस्थाएं नहीं होने के कारण भारी मात्रा में खराब हो जाता था। इसी को देखते हुए पिछले वर्ष से मंडी निदेशालय ने यहां के सेब की ब्रांडिंग शुरू की और अब यहां पर सेब उत्पादन को एक इंडस्ट्रीज के रूप में विकसित करने की योजना भी बनाई है।
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खास बात यह है कि उत्तरकाशी के हर्षिल क्षेत्र के सेब की डिमांड विदेशों से भी आने लगी है। दिल्ली में विदेशी कंपनियों की एजेंसियों ने हर्षिल के प्रसिद्ध रेड डेलीसस, रॉयल और गोल्डन डेलीसस की ज्यादा डिमांड की है।
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बता दें कि कई मामलों में उद्यान विभाग की सुस्ती के कारण फल उत्पादन में बेहतर परिणाम न मिलने के कारण अब इस दिशा में मंडी निदेशालय ने अपनी भूमिका सक्रिय की है। इस सीजन से मंडी निदेशालय राज्य के फल उत्पादकों को उपलब्ध कराई जानी वाली गत्ते की पेटियों को भी 50 प्रतिशत की सब्सिडी के साथ उपलब्ध करा रहा है।