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प्रद्युम्न मर्डर केसः अगर स्कूल ने उठाया होता ये कदम तो बच जाती मासूम की जान

Fri, 15 Sep 2017 08:22 AM IST
ब्यूरो / अमर उजाला, देहरादून
ब्यूरो / अमर उजाला, देहरादून Updated Fri, 15 Sep 2017 08:22 AM IST
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रायन इंटरनेशनल स्कूल - फोटो : अमर उजाला

रायन इंटरनेशनल जैसे प्रतिष्‍ठित स्कूल के प्रबंधन ने अगर ये कदम पहले उठाया होतो तो आज प्रद्युम्न की जान बच जाती है। हालांकि सीबीएसई द्वारा पहले ऐसी कोई गाइडलाइन जारी नहीं की गई, लेकिन स्कूल प्रबंधन खुद भी बच्चों की सुरक्षा के लिए ये कदम उठा सकता ‌था।

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ryan school - फोटो : अमर उजाला
केंद्रीय माध्यमिक शिक्षा बोर्ड (सीबीएसई) ने गुरुग्राम में हुए बच्चे के मर्डर के बाद देशभर के स्कूलों के लिए सर्कुलर जारी किया है। इसके मुताबिक किसी भी स्तर पर स्कूल की लापरवाही पकड़ में आई तो सीधे मान्यता खत्म कर दी जाएगी। सीबीएसई स्कूलों में काम करने वाले ड्राइवर, चपरासी, कंडक्टर और माली सहित पूरे गैरशैक्षिक स्टाफ का साइकोमीट्रिक टेस्ट और वेरिफिकेशन कराया जाएगा। 
 
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रयान स्कूल में तैनात पुलिस
सीबीएसई के उपसचिव (एफिलिएशन) जयप्रकाश चतुर्वेदी की ओर से जारी सर्कुलर के मुताबिक बच्चों का यह अधिकार है कि उन्हें सुरक्षित माहौल में पढ़ने का मौका मिले। इसके तहत सभी स्कूलों को नए सिरे से लोकल पुलिस स्टेशन के माध्यम से तत्काल सिक्योरिटी ऑडिट कराना होगा।

 
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इसकी पूरी रिपोर्ट दो माह के भीतर सीबीएसई की वेबसाइट पर उपलब्ध करानी होगी। इसके अलावा स्कूल परिसर में सभी मुख्य जगहों के अलावा सुनसान जगहों पर सीसीटीवी कैमरे लगाने होंगे। बोर्ड के मुताबिक पूरे स्टाफ का पुलिस वेरिफिकेशन और साइकोमीट्रिक टेस्ट अनिवार्य है। खासतौर से नोन टीचिंग स्टाफ जैसे ड्राइवर, चपरासी, माली और कंडक्टर आदि का वेरिफिकेशन व टेस्ट तुरंत करवाने को कहा गया है।

 
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रायन इंटरनेशनल स्कूल - फोटो : अमर उजाला
यह भी सुनिश्चित करने को कहा गया है कि केवल अधिकृत एजेंसी से ही ऐसे स्टाफ की भर्ती की जाए। इसके अलावा सभी स्कूलों में पैरेंट्स-टीचर-छात्र समिति का गठन करने, बच्चों की सुरक्षा को लेकर उनसे फीडबैक लेने, स्कूल परिसर में बाहरी व्यक्तियों के प्रवेश पर लगाम लगाने, स्टाफ को उनकी जिम्मेदारियों और बच्चों की सुरक्षा के प्रति प्रशिक्षित करने, स्कूल में अलग से पब्लिक, स्टाफ, पैरेंट्स, छात्रों की शिकायतों को शिकायत निवारण समिति का गठन करने और प्रोटेक्शन ऑफ चिल्ड्रन ऑन सेक्सुअल ऑफेंस (पोस्को) एक्ट के तहत समिति का गठन करने के निर्देश दिए गए हैं।

 
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