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बर्फबारी के बीच केदारनाथ धाम में सालों बाद दिखा ऐसा अद्भुत नजारा, देखकर आपको भी होगी हैरानी... 

Sat, 23 Feb 2019 04:43 PM IST
अलका त्यागी न्यूज डेस्क/अमर उजाला, रुद्रप्रयाग
न्यूज डेस्क/अमर उजाला, रुद्रप्रयाग Published by: अलका त्यागी Updated Sat, 23 Feb 2019 04:43 PM IST
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After many years snowfall covered all kedarnath dham with 14 feet snow
snowfall/uttarakhand

मौसम के बिगड़े मिजाज और केदारनाथ में रिकार्ड बर्फबारी ने शासन, प्रशासन की मुश्किलें बढ़ा दी हैं। जंगलचट्टी से केदारनाथ तक पांच फीट से साढ़े 14 फीट तक बर्फ मौजूद है। ऐसे में यात्रा तैयारियों को समय पर पूरा करना चुनौती बना हुआ है।

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After many years snowfall covered all kedarnath dham with 14 feet snow
kedarnath, snowfall - फोटो : अमर उजाला

11500 फीट से अधिक ऊंचाई पर स्थित केदारनाथ धाम में 21 जनवरी से 21 फरवरी तक आठ बार भारी बर्फबारी हो चुकी है। मंदिर परिसर, मंदिर मार्ग, मंदाकिनी नदी किनारे नवनिर्मित आस्था पथ, वेली ब्रिज, एमआई-26 हेलीपैड 14 फीट से अधिक बर्फ से ढके हुए हैं। मंदिर की छत पर बर्फ की मोटी परत जमी है। यही स्थिति कॉटेज और अन्य आवासीय भवनों की भी बनी है।

After many years snowfall covered all kedarnath dham with 14 feet snow
snowfall/kedarnath

वर्ष 2014-15 के बाद केदारनाथ में यह स्थिति देखने को मिल रही है, लेकिन तब जनवरी तक ही भारी बर्फबारी हुई थी। इस बार मौसम विभाग ने आगामी मार्च के पहले हफ्ते में भी ऊंचाई वाले क्षेत्रों में भारी बर्फबारी का पूर्वानुमान बताया है। इन हालात में अप्रैल-मई में शुरू होने वाली केदारनाथ यात्रा की तैयारियों पर व्यापक असर पड़ सकता है।

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After many years snowfall covered all kedarnath dham with 14 feet snow
snowfall/kedarnath

हालात इस कदर हैं कि बीते एक महीने से केदारनाथ में बिजली और पानी की सप्लाई ठप है। साथ ही पुनर्निर्माण कार्य भी नहीं हो रहे हैं। यहां सिर्फ 11 मजदूर रह रहे हैं, जो तीर्थ पुरोहितों के लिए मकान बना रहे हैं। दूसरी तरफ गौरीकुंड-केदारनाथ 17 किमी पैदल मार्ग पर भीमबली के बाद से आवाजाही संभव नहीं है। यहां रेन सेल्टर, रेलिंग, बैठने की बेंच, शौचालय, जीएमवीएन के हट्स को भारी क्षति पहुंची है।

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After many years snowfall covered all kedarnath dham with 14 feet snow
snowfall/uttarakhand

रामबाड़ा से रुद्रा प्वाइंट तक ग्लेशियर जोन भी सक्रिय है, जिन्हें पार करना इस बार आसान नहीं है। बर्फबारी से लकदक रास्ते पर संबंधित विभाग अपनी संपत्तियों की क्षति का आकलन भी नहीं कर पाए हैं। ऐसे में आने वाले दिन प्रशासन और विभागों के लिए मुश्किल भरे हो सकते हैं।

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