बालिका वधु, बालवीर, तुझसे है राबता और वारिस जैसे टेलीविजन धारावाहिक में अभिनय से अपनी अलग पहचान बनाने वाली अभिनेत्री व गायक रूप दुर्गापाल ने महिलाओं से अपने अनुभव साझा किए। शनिवार को अमर उजाला कार्यालय में आयोजित अपराजिता कार्यक्रम में रूप ने बतौर मुख्य अतिथि शिरकत कर अभिनय की बारीकियां भी सिखाईं।रूप ने कहा, सीखने की कोई उम्र नहीं होती।
वह हर दिन, हर व्यक्ति से कुछ नया सीखती हैं। इसका लाभ उन्हें अपने कॅरिअर में मिलता है। कहा, अभिनय के क्षेत्र में कला का होना बहुत जरूरी है। अगर आप में काबलियत है तो आपको सफल होने से कोई नहीं रोक सकता। अपने कॅरिअर के अनुभव साझा करते हुए रूप ने बताया, उनके पिता डॉ. जेसी दुर्गापाल चाहते थे कि वह डॉक्टर बनें और मां डॉ. सुधा दुर्गापाल चाहती थीं कि वह इंजीनियर बनें।
जबकि वह खुद वैज्ञानिक बनना चाहती थीं। इन सबके बीच उन्होंने देहरादून के एक निजी विश्वविद्यालय से इंजीनियरिंग की पढ़ाई की। लेकिन, पुणे में कुछ महीने तक काम करने के बाद उन्होंने अभिनय में हाथ आजमाया। इस दौरान उन्होंने युवाओं व उनके अभिभावकों के सवालों के जवाब भी दिए।
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संवाद में अपनी बात रखती रूप दुर्गापाल
- फोटो : amar ujala
कार्यक्रम में मौजूद अर्चना सिंघल ने कहा, उनका सपना था कि वह कथक नृत्यांगना बनें। लेकिन, बचपन में उन्हें मौका नहीं मिला और शादी के बाद उन्होंने कथक सीखा। आज वह कई बालिकाओं को कथक की बारीकियां सिखाती हैं। मौनिका जैन ने कहा, नृत्य के क्षेत्र में वह अपना कॅरिअर बनाना चाहती थीं।
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रूप दुर्गापाल
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शादी के बाद उन्होंने नृत्य सीखा और आज वह अपना यूट्यूब चैनल भी चलाती हैं। वहीं, कार्यक्रम के अंत में रूप ने पहाड़ी गीत हाई तेरी रुमाला, कैले बाजी मुरुली... गीतों की प्रस्तुति से सबको मंत्रमुग्ध कर दिया। कार्यक्रम में युगांशा नेगी, मानिका जैन, स्तुति शर्मा, मौनिका जैन, प्रभा त्यागी, अर्चना सिंघल, कल्पना जोशी, प्रियांशी मितल, संध्या, विभा दुम्का, सिया मौर्य, रीता आदि मौजूद रहीं।
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अमर उजाला अपराजिता संवाद
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रूप ने कहा, उनकी मां अकसर उन्हें कहती थी, कोई भी काम करो लेकिन उसकी ट्रेनिंग लेना बहुत जरूरी है।
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अमर उजाला अपराजिता संवाद
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अभिनय का मंत्र देते हुए उन्होंने युवाओं से कहा, किसी भी क्षेत्र में कॅरिअर बनाने के लिए ट्रेनिंग जरूर लें।