जिम्बाब्वे और श्रीलंका के बीच कोलंबो में खेला जा रहा एकमात्र टेस्ट काफी रोमांचक मोड़ पर खड़ा है। जिम्बाब्वे की टीम करीब दो दशक बाद उलटफेर करने के करीब पहुंच गई है। कमजोर मानी जाने वाली जिम्बाब्वे को ऐतिहासिक जीत के करीब पहुंचाने वाला अहम किरदार रहा सिकंदर रजा।
रजा की बदौलत दो दशक बाद टेस्ट क्रिकेट में बड़े उलटफेर की दहलीज पर पहुंचा जिम्बाब्वे
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सिकंदर रजा ने रविवार को श्रीलंका के खिलाफ जिम्बाब्वे की दूसरी पारी में धमाकेदार शतक जमाया। छठें क्रम पर बल्लेबाजी करने आए रजा ने 205 गेंदों में 9 चौको व एक छक्के की मदद से 127 रन की पारी खेली। टेस्ट के चौथे दिन सुबह के सत्र में रंगना हेराथ ने क्लीन बोल्ड करके रजा की पारी का अंत किया। उल्लेखनीय है कि अपने करियर का पांचवां टेस्ट खेल रहे रजा ने टेस्ट क्रिकेट में अपना डेब्यू शतक भी जमाया।
रजा तीसरे दिन जब बल्लेबाजी करने के लिए उतरे तो उनकी टीम संकट की स्थिति में थी। पहली पारी में 356 रन बनाने वाली जिम्बाब्वे दूसरी पारी में एक समय सिर्फ 23 रन पर चार विकेट खोकर संघर्ष कर रही थी। स्कोर 59 रन पर पहुंचा ही था कि शॉन विलियम्स (22) भी पवेलियन लौट गए।
रजा ने पुछल्ले बल्लेबाजों पीटर मूर (40) और मालकॉम वॉलर (68) के साथ क्रमशः 86 और 144 रन की साझेदारी करके जिम्बाब्वे की न सिर्फ वापसी कराई जबकि उसको बेहद मजबूत स्थिति में भी पहुंचा दिया। समाचार लिखे जाने तक जिम्बाब्वे ने श्रीलंका पर 350 रन की बढ़त हासिल कर ली है, जबकि उसके दो विकेट शेष हैं। याद हो कि जिम्बाब्वे ने हाल ही में श्रीलंका को उसी की जमीन पर वन-डे सीरीज में 3-2 से हराया था।
इसके बाद टेस्ट में भी उसका अच्छा प्रदर्शन जारी रहा और इसका नतीजा है कि वो बड़े उलटफेर के करीब पहुंच गया है। जिम्बाब्वे ने 1998 में भारत और पाकिस्तान को टेस्ट सीरीज में हराया था, जो उसके क्रिकेट इतिहास की अब तक की सबसे बड़ी उपलब्धि है। जिम्बाब्वे ने पहले भारत को अपने घर में एकमात्र टेस्ट में हराया और फिर पाकिस्तान को उसके घर में जाकर तीन मैचों की टेस्ट सीरीज में 1-0 से हराया था। इसके बाद से जिम्बाब्वे ने कुल 6 टेस्ट ही जीते हैं और ये सभी बांग्लादेश के खिलाफ जीते गए हैं। जिम्बाब्वे का ओवरऑल टेस्ट रिकॉर्ड इस प्रकार है, 1992 से 101 टेस्ट खेले, 11 जीते, बांग्लादेश के खिलाफ 6, पाकिस्तान के खिलाफ 3 और भारत के खिलाफ 2 टेस्ट जीते।