युवराज सिंह बुधवार को अपना 37वां जन्मदिन मना रहे हैं। युवराज सिंह को टीम इंडिया का कमबैक किंग भी कहा जाता है क्योंकि उन्होंने कैंसर को मात देने के बाद क्रिकेट के मैदान पर वापसी की। इसके अलावा कई बार युवी को राष्ट्रीय टीम से बाहर का रास्ता दिखाया गया, लेकिन फिर उन्होंने जबरदस्त वापसी की और अपना सिक्का जमाया। युवी ने टीम इंडिया को दो विश्व कप जिताने में अहम भूमिका निभाई। इसके अलावा भी उनकी उपलब्धियां अपार हैं। चलिए जानते हैं युवी से जुड़े यादगार तथ्य:
बचपन में युवराज सिंह रोलर-स्केटिंग के प्रति काफी लगाव था। उन्होंने राष्ट्रीय अंडर-14 रोलर-स्केटिंग चैंपियनशिप में खिताबी जीत भी हासिल की। मगर उनके पिता योगराज सिंह ने बेटे के मेडल फेंककर कहा कि पूरा ध्यान क्रिकेट पर लगाएं। युवी टेनिस भी अच्छा खेलते थे। मगर क्रिकेट पर ध्यान लगाने की वजह से उन्हें इन दोनों खेलों से समझौता करना पड़ा।
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yuvraj and harbhajan singh
- फोटो : File
युवी थोड़ा बड़े हुए तो उन्हें मुंबई में एल्फ-वेंगसरकर क्रिकेट एकेडमी में अभ्यास के लिए भेजा गया। मुंबई में युवराज क्रिकेट लेखक मार्कंड वायंगनकर के घर अंधेरी इलाके में रहे। वायंगनकर ने अपनी किताब युवी में किस्सा बताया कि युवराज मुंबई में लोगों को देखकर कहता था, मैक अंकल, मुंबई पूरा लोगों से भरा है। चंडीगढ़ पूरा पेड़ से भरा है।
पंजाब के लिए खेलते हुए विजय मर्चेंट ट्रॉफी में जम्मू और कश्मीर के खिलाफ युवी ने अकेले 279 रन की पारी खेली। उनकी इस पारी की बदौलत पंजाब ने 498 रन बनाए। जवाब में जम्मू और कश्मीर की टीम पहली व दूसरी पारी में क्रमश: 65 और 149 रन पर ऑलआउट हो गई। इसका मतलब यह हुआ कि विरोधी टीम युवी के कुल स्कोर से 65 रन से हार गई।
युवराज सिंह टी20 क्रिकेट खेलने वाले भारत के क्रिकेटर हैं। जी हां, टी20 क्रिकेट की शुरुआत 2003 में इंग्लैंड में हुई। युवराज सिंह, मोहम्मद कैफ और वीरेंद्र सहवाग तीनों काउंटी क्रिकेट का हिस्सा थे। 14 जून 2003 को युवराज और कैफ दोनों टी20 क्रिकेट खेलने वाले पहले भारतीय क्रिकेटर बने। युवराज ने यॉर्कशायर की तरफ से खेलते हुए डर्बीशायर के खिलाफ 44 रन बनाए। कुछ दिनों के बाद युवी ने सहवाग की लेस्टरशायर के खिलाफ 71 रन की पारी खेली और टी20 क्रिकेट में अर्धशतक जमाने वाले देश के पहले क्रिकेटर बने।