थ्री इडियट्स तो आपने देखी ही होगी। फरहान कुरैशी भी याद ही होंगे। अगर याद नहीं हैं तो हम बता देते हैं कि उन्होंने जैसे-तैसे इंजीनियरिंग की थी, लेकिन आखिर में अपने दिल की आवाज सुनी और वाइल्ड लाइफ फोटोग्राफर बन गए। अब आप यह सोच रहे होंगे कि हम आपको थ्री इडियट्स की कहानी क्यों सुना रहे हैं?
दरअसल, इस कहानी की कड़ियां अब भारतीय क्रिकेट टीम से जुड़ रही हैं। जिम्बाब्वे दौरे के लिए भारतीय टीम में एक ऐसा धाकड़ ऑलराउंडर जुड़ा है, जिसकी जिंदगी थ्री इडियट्स के फरहान कुरैशी से बेहद मिलती-जुलती है।
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विराट कोहली के साथ शाहबाज अहमद
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यह कहानी है आरसीबी के शाहबाज अहमद की, जिन्होंने अपने पिता की जिद के चलते किसी तरह इंजीनियरिंग कर ली, लेकिन आखिर में अपने दिल की सुनी और क्रिकेटर बन गए। शाहबाज ने इंजीनियर से क्रिकेटर का सफर कैसे तय किया, रूबरू होते हैं इस स्पेशल रिपोर्ट में...
शाहबाज 2020 से रॉयल चैलेंजर्स बैंगलोर के सदस्य हैं। घरेलू क्रिकेट में जमकर मेहनत और आईपीएल में कुछ बेहतरीन प्रदर्शन ने उन्हें टीम इंडिया में जगह दिलाई है। 27 वर्षीय शाहबाज अहमद एक बैटिंग ऑलराउंडर हैं। लिस्ट-ए में शाहबाज का बल्लेबाजी औसत 47.28 का है, जबकि उनकी गेंदबाजी का औसत 39.20 है। आईपीएल खेलने के बाद से बतौर बल्लेबाज शाहबाज ने सुधार दिखाया है।
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शाहबाज अहमद
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शाहबाज ने आईपीएल में 29 मैच खेले हैं। इसमें उन्होंने 18.6 की औसत और 118.72 के स्ट्राइक रेट से 279 रन बनाए हैं। वहीं, गेंदबाजी में शाहबाज ने 13 विकेट लिए हैं। उनका इकोनॉमी रेट 8.58 का है। वहीं, सात रन देकर तीन विकेट उनकी बेस्ट बॉलिंग परफॉर्मेंस है।
आईपीएल 2022 में शाहबाज ने एक अहम पारी खेलकर अपना नाम चमकाया था। शाहबाज ने राजस्थान रॉयल्स के खिलाफ इस साल पांच अप्रैल को आरसीबी को मिली जीत में अहम भूमिका निभाई थी। उन्होंने 26 गेंद पर 45 रन बनाए। इस दौरान चार चौके और तीन छक्के लगाए। उनका स्ट्राइक रेट 173.08 का रहा था।
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शाहबाज अहमद
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पिता ने नौकरी के लिए गांव छोड़ा था
हरियाणा के मेवात जिले के रहने वाले शाहबाज के क्रिकेट तक पहुंचने की कहानी रोचक है। आरसीबी के इस ऑलराउंडर के पिता अहमद जान हरियाणा में एसडीएम के रीडर हैं। उन्होंने बच्चों की पढ़ाई और अपनी नौकरी को लिए गांव छोड़ दिया था। उनका सपना था कि बेटा शाहबाज इंजीनियर बने, लेकिन ऐसा नहीं हुआ। शाहबाज को क्रिकेट से प्यार था और उन्होंने इसे ही चुना।
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शाहबाज अहमद
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शाहबाज के दादाजी भी खेलते थे क्रिकेट
शाहबाज के खून में क्रिकेट उनके दादाजी से आया। अहमद जान के पिता को भी क्रिकेट का शौक था। मेवात में क्रिकेट के लिए ज्यादा सुविधाएं नहीं थीं। उनका गांव पढ़ाई-लिखाई के लिए जाना जाता है। वहां डॉक्टर-इंजीनियर की संख्या ज्यादा है। यहां तक कि शाहबाज की छोटी बहन फरहीन डॉक्टर हैं और फरीदाबाद के एक अस्पताल में ट्रेनिंग कर रही हैं। शाहबाज के पिता चाहते थे कि उनका बेटा इंजीनियर बने। इसके लिए फरीदबाद के कॉलेज में उनका एडमिशन भी कराया।